
नई दिल्ली। इस्लामिक देशों में महिलाओं को आज भी आवश्यक अधिकार नहीं दिए गए हैं और न ही वे पुरुषों के समान अधिकार पा सकी हैं। लेकिन परिस्थितियों में धीरे-धीरे परिवर्तन होता हुआ दिखाई दे रहा है। हाल ही में सऊदी अरब स्थित मुस्लिमों के पवित्र धर्म स्थल मक्का मदीना (Mecca Medina) में एक महिला को सुरक्षा गार्ड के तौर पर नियुक्त किया गया है। बता दें कि इस पहली महिला सुरक्षा गार्ड का नाम मोना है और वह अपने पिता से प्रेरित होकर सैनिक बनना चाहती थी।
मोना कर रहीं पिता का अनुसरण
मोना के सैनिक बनने के बाद ही उसकी नियुक्ति यहां की गई है। मोना सऊदी वीमन सोल्जर्स ग्रुप का हिस्सा हैं। इसीलिए हज यात्रियों की सुरक्षा के लिए मक्का मदीना में तैनात है।
मोना ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मैं अपने पिता का अनुसरण कर रही हूं ताकि उनके सफर को पूरा कर सकूं। इसलिए मैं मक्का मदीना में तैनात हूं और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करना एक जिम्मेदारी भरा काम है।'
मोना ने की है मनोविज्ञान की पढ़ाई
मोना ने मनोविज्ञान की पढ़ाई की और बाद में सैनिक बन गईं। मोना को करियर के चयन में उसके परिवार ने खूब सहयोग किया। मोना के अनुसार धर्म की सेवा, देश की सेवा और अल्लाह के मेहमानों की सेवा करना उसके लिए गर्व की बात है।
प्रिंस सलमान ने तैयार किया विजन 2030
गौरतलब है कि अप्रैल से अब तक दर्जनों महिला सैनिकों की नियुक्ति मक्का मदीना में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए की जा चुकी है। सऊदी के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सऊदी में कई सामाजिक और आर्थिक सुधारों पर बल दे रहे हैं ताकि निवेशकों की सऊदी अरब में रूचि बढ़े। सुधार प्रक्रिया के खाके को तैयार किया गया है, जिसे विजन 2030 का नाम दिया गया है।
प्रिंस सलमान ने महिलाओं पर से कई पाबंदियां हटाने का काम किया है। जैसे अब वयस्क महिलाएं बिना परिजनों की आज्ञा के घर से बाहर निकल सकती हैं और पारिवारिक मुद्दों पर भी महिलाओं को नियंत्रण का अधिकार दिया जा चुका है। ऐसे में यह कहा जा सकता है सऊदी अरब में महिलाओं की परिस्थितियों बदलाव आ रहा है और विजन 2030 के अनुसार और बदलाव आने की संभावना भी प्रबल रूप से जताई जा रही है।