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आरएसएफ ने फिर बरपाया कहर, सूडान में 15 निर्दोषों की ली जान

Sudan Conflict: सूडान में आरएसएफ का आतंक अभी भी खत्म नहीं हुआ है। एक बार आरएसएफ ने कत्लेआम मचाते हुए 15 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
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भारत

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Tanay Mishra

Jul 25, 2026

RSF fighters

आरएसएफ के लड़ाके (File Photo)

सूडान (Sudan) में सेना और अर्धसैनिक बल (पैरामिलिट्री) रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़ - आरएसएफ (Rapid Support Forces - RSF) के बीच चल रहे गृहयुद्ध को 3 साल से ज़्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अभी भी यह खत्म नहीं हुआ है और न ही ऐसा होने की संभावना नज़र आ रही है। 15 अप्रैल 2023 को दोनों पक्षों के बीच जंग की शुरुआत हुई थी। अभी भी देश में हमले थमे नहीं हैं। आरएसएफ समय-समय पर देश में कत्लेआम मचाता रहता है और अब एक बार फिर ऐसा ही मामला सामने आया है।

15 निर्दोषों की ली जान

आरएसएफ ने उत्तरी कोर्डोफन (North Kordofan) राज्य की राजधानी अल ओबैद (El Obeid) के दक्षिण में स्थित बर्बर इलाके में कत्लेआम मचा दिया। शुक्रवार को आरएसएफ के लड़ाकों ने हर बार की तरह निर्दोष सामान्य नागरिकों को निशाना बनाया और 15 लोगों की जान ले ली। राज्य सरकार ने इसकी पुष्टि की।

7 लोग घायल

उत्तरी कोर्डोफन राज्य की राजधानी अल ओबैद के बर्बर इलाके शुक्रवार को आरएसएफ के हमले में 7 लोग घायल हो गए, जिसकी जानकारी राज्य सरकार ने दी। घायलों का इलाज चल रहा है।

मवेशियों को लूटा

आरएसएफ के लड़ाकों ने सिर्फ कत्लेआम ही नहीं मचाया, बल्कि लूटपाट को भी अंजाम दिया। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि आरएसएफ के लड़ाके हमले के बाद कई मवेशियों को लूटकर ले गए।

इलाके पर कब्ज़ा करना चाहता है आरएसएफ

युद्ध के दौरान उत्तरी कोर्डोफन राज्य और राजधानी अल ओबैद में काफी हमले देखने को मिले हैं। हालांकि सेना के आने के बाद से कंट्रोल उनके पास है, लेकिन आरएसएफ बर्बर इलाके पर कब्ज़ा करना चाहता है, जो अल ओबैद में करीब 31 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। इसी वजह से आरएसएफ ने गुरुवार को भी इस इलाके में हमला किया था।

बड़ी संख्या में लोग कर रहे हैं खाने के संकट का सामना

सूडान में चल रहे गृहयुद्ध की वजह से करीब 2 करोड़ लोग कर रहे हैं खाने के संकट का सामना कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक प्रवक्ता ने खाद्य और कृषि संगठन (FAO), विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) का हवाला देते हुए जानकारी दी कि करीब 2 करोड़ लोग देश में गंभीर खाद्य असुरक्षा के संकटपूर्ण स्तर का सामना कर रहे हैं। जब तक युद्ध खत्म नहीं होता, हालात में पूरी तरह से सुधार होने की संभावना न के बराबर है।