
दिल (Representational Photo)
हम सुनते आ रहे हैं कि आंत इंसान का 'दूसरा दिमाग' है क्योंकि वहाँ पाचन और हार्मोन नियंत्रण के लिए न्यूरॉन्स का एक विशाल नेटवर्क होता है। अब अमेरिका (United States of America) की येल यूनिवर्सिटी (Yale University) के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है कि हमारे दिल (Heart) के पास भी अपना एक 'दिमाग' मौजूद है जो आकार में छोटा होता है। कैसे करता है यह काम? आइए जानते हैं।
साइंस जर्नल सेल में प्रकाशित इस रिसर्च के अनुसार दिल अपनी धड़कनें नियंत्रित करने और कठिन परिस्थितियों में खुद को बचाने के लिए पूरी तरह से मुख्य दिमाग के इशारों का इंतज़ार नहीं करता। उसके पास अपना खुद का एक नर्वस सिस्टम है जो स्थानीय स्तर पर फैसले लेता है। वैज्ञानिकों ने दिल के आसपास मौजूद वसायुक्त ऊतकों में फैले 'इंट्रिंसिक कार्डिएक नर्वस सिस्टम' (आईसीएनएस) पर रिसर्च की। यह नेटवर्क दिल की कुल कोशिकाओं का केवल 0.01% हिस्सा है, लेकिन स्थानीय कमांड सेंटर की तरह काम करता है। यह तंत्रिका तंत्र मस्तिष्क से आने वाले संकेतों को केवल आगे नहीं बढ़ाता, बल्कि उनकी व्याख्या कर परिस्थितियों के अनुसार धड़कन की गति भी समायोजित करता है।
जेनेटिक रूप से संशोधित चूहों पर की गई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने दो प्रमुख न्यूरॉन सब-टाइप्स की पहचान की। एनपीवाई न्यूरॉन्स दिल की धड़कन की गति नियंत्रित करते हैं। इन्हें हटाने पर चूहों में हार्ट फेलियर से मृत्यु हो गई। वहीं डीडीएएच न्यूरॉन्स तनाव की स्थिति में दिल की सुरक्षा करते हैं। इनके बिना तनाव के दौरान दिल सामान्य रूप से काम नहीं कर पाया।
फिलहाल कार्यात्मक परीक्षण सिर्फ चूहों पर हुए हैं, लेकिन अगर इंसानों में भी इनकी भूमिका समान साबित होती है तो दिल रोगों के इलाज में बड़ा बदलाव आ सकता है। हार्ट फेलियर, एरिथमिया और तनाव के दौरान होने वाले कार्डिएक अरेस्ट के लिए नई दवाओं और उपचार तकनीकों का रास्ता खुल सकता है। भविष्य में मुख्य दिमाग के बजाय सीधे दिल के इस स्थानीय नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर धड़कनों को नियंत्रित करने की संभावना भी बन सकती है। इससे काफी फायदा हो सकता है।
Updated on:
25 Jul 2026, 2:07 AM IST
Published on:
25 Jul 2026, 2:07 AM IST
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