अमरीकी सेना के सीक्रेट मिशन कमांड के लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन ओ'डोनेल ने जानकारी देते हुए बताया है कि अमरीकी सेना द्वारा अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान के सीमावर्ती इलाकों में आतंकियों के सफाये के लिए 13 जून से ही अभियान चलाया जा रहा है
नई दिल्ली।अमरीका ने अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत कुनार में तहरीक-ए-तालिबान के सरगना और प्रमुख आतंकी मुल्ला फजलुल्लाह को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया है। अमरीकी सेना के प्रवक्ता ने अमरीकी मीडिया से बातचीत में इस ड्रोन हमले की पुष्टि की है। हालांकि एजेंसी की खबरों के मुताबिक मुल्ला फजलुल्लाह के मारे जाने के सूचना आ रही है लेकिन अभी मुल्ला के मारे जाने की पुष्टि नहीं हो सकी है।
कई हमलों का है मास्टरमाइंड
अमरीकी सेना के सीक्रेट मिशन कमांड के लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन ओ'डोनेल ने जानकारी देते हुए बताया है कि अमरीकी सेना द्वारा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में आतंकियों के सफाये के लिए 13 जून से ही अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत ड्रोन हमले में फजलुल्लाह के संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमरीकी सेना के अनुसार मुल्ला ने ही 11/ 09 के आतंकियों को ट्रेनिंग दी थी। 2010 में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में कार बम विस्फोट में भी इसका नाम आया था। साथ ही दिसम्बर 2014 में पेशावर के आर्मी स्कूल के हमले में भी इसका हाथ था। इस हमले में करीब 150 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 245 लोग घायल हो गए थे। मलाला यूसुफजई पर हुए हमले में भी इसकी भूमिका थी।
अमरीकी सेना ने घोषित किया था 50 लाख डॉलर इनाम
अमरीका के विदेश विभाग ने मार्च 2018 में ही में फजलुल्लाह का पता बताने वाले को 50 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा की थी।फजलुल्लाह पर पाकिस्तान में कई हमलों के मामले दर्ज हैं। साथ ही अमरीका में उसे तालिबान का मुख्य चहेरा मानते हुए कई मामलों में दोषी बनाया गया था। बताया जा रहा है कि कई आक्रामक अभियानों के बाद तहरीक- ए-तालिबान को पाकिस्तान से खदेड़ दिया गया था, जिसके बाद फजलुल्लाह ने अफगानिस्तान में शरण ले ली थी। 2013 में अमरीकी ड्रोन हमले में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान सरगना हकीमुल्ला के मारे जाने के बाद फजलुल्लाह को सरगना बनाया गया था।
बता दें कि अमरीका अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्र में पनप रहे आतंकवाद पर पिछले कई सालों से सख्ती दिखा रहा है। अमरीका ने मुल्ला के अलावा दो और पाकिस्तानी आतंकियों की जानकारी देने वालों को इनाम देने की घोषणा की थी। अब्दुल वली और मनाल वाघ पर तीन-तीन मिलियन डॉलर का इनाम रखा गया था।