
नई दिल्ली। सत्तर साल बाद अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच दोस्ती की शुरुआत से भारत को लाभ मिलना तय है। इस अवसर का लाभ उठाकर भारत आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तर पर लाभ उठा सकता है। यही कारण है कि भारत ने ट्रंप और किम की मुलाकात का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया है। आपको बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में संयुक्त राष्ट्र और अमरीका के प्रतिबंध के चलते भारत के लिए उत्तर कोरिया से दोस्ती को पहले की तरह बनाए रख पाना संभव नहीं था। इसका लाभ उठात हुए पाकिस्सतान ने उत्तर कोरिया से करीबी बनाने में सफल रहा। पाकिस्तान गुपचुप तरीके से उत्तर कोरिया को भारत के खिलाफ उकसाता रहा। यहां तक कि उसने उत्तर कोरिया को भारत के खिलाफ खड़ा करने के लिए परमाणु तकनीक भी देता रहा। इसका खामियाजा यह हुआ कि उत्तर कोरिया ने अमरीका तक को बर्बाद करने की धमकी दे डाली, जो उसके लिए नुकसानदेह साबित हुआ।
1. पाकिस्तान पर नियंत्रण
पाकिस्तान के इस रणनीति के खिलाफ भारत लगातार उत्तर कोरिया और पाकिस्तान के बीच परमाणु गठजोड़ का मामला उठाता रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने कहा था कि पाकिस्तान ने गुपचुप तरीके से उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक हस्तांतरित की है। भारत के इस आरोप के बावजूद यूएन ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। लेकिन पाकिस्तान अब ऐसा नहीं कर पाएगा। ऐसा इसलिए कि किम और ट्रंप की दोस्ती बढ़ने का सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तान और चीन को होगा। भारत इस अवसर का लाभ उठाते हुए पाकिस्तान को यूएन के जरिए नियंत्रित कर सकता है। इस मकसद से एक साल पहले केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने उत्तर कोरिया का दौरा किया था जो काफी लाभकारी रहा।
2. सुरक्षा चिंता
भारत और उत्तर कोरिया कें बीच दूरी का लाभ उठाते हुए पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ उत्तर कोरिया को उकसाता रहा। लेकिन बदले माहौल में उत्तर कोरिया ने वह आश्वस्त किया कि वो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली किसी भी गतिविधि की इजाजत नहीं देगा। इससे भारत की चिंता काफी हद कम हुई है। हालांकि अभी उत्तर कोरिया पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू रहेंगे, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि उत्तर कोरिया के खिलाफ लगे वैश्विक और अमेरिकी प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे।
3.कारोबार
अगर ऐसा हुआ तो भारत को उत्तर कोरिया के रूप में एक उभरता हुआ बाजार मिल जाएगा, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को धार देने में मदद मिलेगी। वहीं उत्तर कोरिया के बाजार में चीन की चुनौती बढ़ेगी। अभी तक उत्तर कोरिया अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से अलग-थलग पड़ा था, जिसके चलते वहां के बाजार में चीन का एकछत्र राज था। इस तरह अमरीका और उत्तर कोरिया की दोस्ती जहां एक ओर भारत के लिए एक अवसर है तो चीन के लिए चिंता पैदा करने वाली साबित होगी।