
नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप जब से अमरीका के राष्ट्रपति बने हैं तभी से दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वॉर शुरू हो गया था जो अब खत्म होने के करीब है। ट्रेड वार को लेकर जारी तनाव को खत्म करने के लिए दोनों सुपरपावर ने आपस में एक समझौता किया है। समझौते के तहत ड्रैगन अब अमरीका से आयात बढ़ाएगा। इससे साफ हो गया है कि ट्रंप के सामने शी जिनपिंग को झुकने के लिए मजबूर होना पड़ा है। आपको बता दें कि दोनों देश के बीच ट्रेड वार के कारण दुनियाभर के बड़े देश अपनी कंपनियों के हित में फैसले लेने लगे थे। लेकिन इस समझौते से ग्लोबल ट्रेड में शामिल कंपनियों ने राहत की सांस ली है। दोनों देशों के बीच इस समझौते से भारत को लाभ मिलने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए कि अमरीका से नजदीकी की वजह से भारत और चीन के बीच दूरी बढ़ी है।
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टल गया ट्रेड वार
चीन की तरफ से अमरीका की शर्त मान लेने के बाद दोनों देशों के बीच शुरू होने वाला ट्रेड वॉर फिलहाल टल गया है। चीन ने अमरीका के आगे झुकते हुए ट्रेड डेफिसिट घटाने के लिए अमरीका से आयात बढ़ाने की सहमति दे दी है। समझौतों के मुताबिक चीन इस ट्रेड डेफिसिट को घटाकर 375 मिलियन डालर पर लाएगा। साथ ही दोनों देश ने पेटेंट कानून संरक्षण को लेकर सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति जताई है। यह फैसला दूसरे दौर की वार्ता के बाद लिया गया। उसके बाद दोनों देशों की तरफ से एक संयुक्त बयान जारी किया गया है, जिसमें बताया गया है कि दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि ट्रेड वार को नहीं बढ़ाएंगे। ट्रेड डेफिसिट घटाने के लिए चीन अमरीका से आयात के लिए तैयार है। चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व शी के विशेष दूत और उपराष्ट्रपति लियू ही ने किया। अमरीका तरफ से वहां के वित्त सचिव स्टीवन म्नूचिन, वाणिज्य सचिव विल्बर रॉस और व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइथाइजर ने किया।
अमरीका ने दी थी सख्त कदम उठाने की चेतावनी
हाल ही में अमरिका ने चीन को धमकी देते हुए कहा था कि वह 100 बिलियन डालर का ट्रेड डेफिसिट को एक महीने के अंदर घटाए और 2020 तक 200 बिलियन डालर का ट्रेड डेफिसिट घटाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो चीन के खिलाफ और कड़े कदम उठाए जाएंगे। चीन की समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार चीन लोगों के उपभोग की जरूरतों को पूरा करने और चीन के उच्च गुणवत्ता वाले आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अमरीकी सामान और सेवा की खरीद में काफी वृद्धि करेगा, जिससे अमरीकी आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा मिलने में भी मदद मिलेगी। दोनों देशों ने अमरीकी कृषि और ऊर्जा उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इस सबंध में आगे की वार्ता के लिए अमेरिका अपना एक प्रतिनिधिमंडल चीन भेजेगा।