पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (93) का 16 अगस्त 2018 को देहांत हो गया। जिसके बाद उनकी अस्थियों का उत्तर प्रदेश की सभी नदियों में विसर्जन किया जा रहा है।
रामपुर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (93) का 16 अगस्त 2018 को देहांत हो गया। जिसके बाद उनकी अस्थियों का उत्तर प्रदेश की सभी नदियों में विसर्जन किया जा रहा है। इसके चलते अटल अस्थी कलश यात्रा निकाली जा रही है और इस क्रम में रामपुर जिले में भी अटल जी की अस्थियां पहुंची। भाजपईयों ने फूलों के साथ उनका स्वागत किया। वहीं इससे पहले भी इस जिले में एक व्यक्ति की अस्थियां आ चुकी हैं।
दरअसल, रामपुर में इससे पहले 11 फरवरी 1948 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अस्थियां भी रामपुर आ चुकी हैं। उस समय बापू की अस्थियों का कुछ हिस्सा कोसी नदी में विसर्जित किया गया और शेष अस्थियों को चांदी के कलश में रखकर यहां दफन कर दिया गया था। आज यहां पर गांधी जी की एक समाधि भी है। यहां मौजूद गांधी समाधि को आधुनिक रूप दिया गया है और लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से इसका सौंदर्यीकरण किया गया है। दूर-दूर से लोग रामपुर की गांधी समाधि को देखने आते हैं।
अटल जी की अस्थियों का स्वागत, पं. दीनदयाल की अनदेखी
रामपुर जिले में अटल जी की अस्थि कलश यात्रा का स्वागत किया गया। वहीं यहां भाजपा के संस्थापकों में गिने जाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय की अनदेखी भी की जा रही है। यही कारण है कि उनकी प्रतिमा के आसपास कूड़ा करकट और गंदा पानी भरा हुआ है। जिस पर अभी तक भी किसी की नजर नहीं गई है।
दरअसल, देश की राजधानी दिल्ली से 195 किलोमीटर दूर रामपुर की शुरुआत जिलाधिकारी आवास से होती है। जिलाधिकारी आवास के बिल्कुल बराबर में ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय की एक प्रतिमा लगी हुई है। जिसके आसपास काफी समय से कूड़ा करकट ही नहीं बल्कि बरसात का गंदा पानी भी भरा हुआ है। हर रोज जिलाधिकारी और नगरपालिका के अधिकारी यहां से गुजरते हैं, लेकिन आज तक किसी की नजर इस पर नहीं पड़ी।
योगी सरकार कैबिनेट के पंचायत राज्यमंत्री भूपेंद्र सिंह से जब पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के आसपास मौजूद गंदगी के बारे में पूछा गया तो वह सवाल का जवाब दिए बिना ही वहां से चले गए।