
मुरादाबाद : बचपन से हम और आप दशहरे पर रामलीला मंचन के दौरान रावण दहन देखते आ रहे हैं। लेकिन हो सकता है कि अब आने वाले समय आपको दशहरे के मेले में रावण का पुतला दहन होते न मिले। जी हां आज इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय ब्राहमण महासभा के लोगों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और मांग की देश भर में कहीं भी रावण का पुतला न फूंका जाए। महासभा का तर्क था इस कुप्रथा से ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत होती। महासभा ने एक ज्ञापन भी मुख्यमंत्री को संबोधित जिलाधिकारी को सौंपा है।
इन्होने जताया विरोध
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के जिला अध्यक्ष सतेंद्र शर्मा ने बताया कि रावण के पुतला दहन पर रोक लगाकर इस प्रथा को समाप्त किए जाना चाहिए। बाकी सारी कुप्रथा को समाप्त किया जा रहा है। जिसमें वर्षों से चली आ रही इस कुप्रथा का अंत हो सके । रावण जैसे परम ज्ञानी विद्वान ब्रह्मपुत्र महा ब्राह्मण का पुतला दहन निंदनीय है। पूरे प्रदेश में एक सूत्रीय मांग को लेकर आज ब्राह्मण समाज की तरफ से यह ज्ञापन भेजा गया। यह ब्राह्मण समाज की तरफ से चेतावनी है,कि अगर यह प्रथा नही रुकी तो हम खुद रावण दहन की प्रथा को खुद रोकेंगे।
सदियों से है परम्परा
यहां बता दें कि रावण का पुतला रामलीला मंचन में सदियों से फूंका जा रहा है। जिसके पीछे तर्क है कि भगवना राम ने सत्य के लिए युद्ध किया जबकि रावण ने असत्य के लिए। इसलिए उसकी हार हुई थी। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में रावण का पुतला दहन किया जाता रहा है। देश भर में ये त्यौहार पूरे धूम धाम से मनाया जाता है और सभी जगह रावण का पुतला दहन होता है। वहीँ ऐसे में अब ब्राहमण महासभा द्वारा रावण के पुतले पर रोक लगाने की मांग एक नया विवाद को जन्म दे सकती है।