प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि संचालन के लिए बिजली की आवश्यकता नहीं है। भारी वस्तुओं को तरल पदार्थ से आसानी से उठाया जा सकता है।
मुरादाबाद: शहर के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज एमआईटी के छात्रों ने एक बार फिर कमाल किया है। यहां दो सगे मौसेरे भाइयों ने जो इंजीनियरिंग की अलग-अलग ब्रांच के स्टूडेंट है,इन्होने ऐसा प्रोजेक्ट बनाकर सिद्ध कर दिया कि कैसे रिश्तो और अलग-अलग हुनर के मेल को दुनिया के लिए एक कारगर आविष्कार करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। दोनों छात्रों ने कबाड़ के जुगाड़ से एक हाइड्रोलिक लिफ्ट का निर्माण किया है। इससे पहले भी दोनों रिमोट कंट्रोल कार, डोर लाक और मिनी कैनेन बना चुके हैं। दोनों भाइयों के इस प्रोजेक्ट को देहरादून में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता के ‘वेस्ट आउट आफ बेस्ट’ में प्रथम स्थान मिला है।
एमआइटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र दिव्यांश खन्ना और इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के छात्र शांतनु अरोड़ा ने हाइड्रोलिक लिफ्ट बनाते समय दिव्यांश और शांतनु की आपस में यह शर्त थी कि जो प्रोजेक्ट में हम बनाएंगे उसमे कबाड़ के समान का इस्तेमाल करेंगे जिसे प्रोजेक्ट की लागत में अपनी जेब से कुछ भी खर्च ना करना पड़े और कबाड़ के सामान से ही वेस्ट आउट आफ बेस्ट बनाया जाए। इसलिए मन में हाइड्रोलिक लिफ्ट बनाने का विचार आया। बेकार सिरिंज, डिप का पाइप, मिठाई का डिब्बा, कुल्फी स्टिक, साइकिल की खराब तीली इस्तेमाल की गयी है।
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इस तरह करेगा प्रोजेक्ट काम
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके संचालन के लिए बिजली की आवश्यकता नहीं है। भारी वस्तुओं को तरल पदार्थ से आसानी से उठाया जा सकता है। मैन पावर से इसका संचालन आसानी से किया जा सकता है। कार वाशिंग व सर्विसिंग जैसे कामों में इस्तेमाल लाया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट में यह भी दिखाया गया कि कैसे कार धोने का पानी रीसाइक्लिंग के लिए एकत्र कर दुबारा प्रयोग में लाया जा सकता है।
यूपीईएस यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज की ओर से देहरादून में टेक्निकल फेस्ट इग्नाइट 2018 एक प्रतियोगिता आयोजित की गयी थी। प्रतियोगिता में दोनों भाइयों के प्रोजेक्ट को प्रथम स्थान मिला है। दोनों छात्रों को संस्थान के निदेशक डॉ भानु प्रताप, मैकेनिकल इंजीनियर के प्रोफेसर डॉ मुनीश छाबड़ा, इलेक्ट्रानिक्स और कम्युनिकेशन के एचओडी डॉ. फारुक हुसैन, आलोक पांडेय समेत सभी ने बधाई दी।