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गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मुरादाबाद में उठी मांग, भारतीय सूफी फाउंडेशन अध्यक्ष ने सरकार से की अपील

Moradabad News: मुरादाबाद में भारतीय सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी कशिश वारसी ने सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है।
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मुरादाबाद

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Mohd Danish

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Updated: 27 May 2026, 9:31 AM IST

cow national animal demand moradabad up

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मुरादाबाद में उठी मांग

Cow National Animal Demand: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भारतीय सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी कशिश वारसी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों लोगों की आस्था गाय से जुड़ी हुई है और सरकार को इस धार्मिक भावना का सम्मान करते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर विचार करना चाहिए। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और विभिन्न वर्गों में इसको लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

सरकार से भावनाओं को समझने की मांग

सूफी कशिश वारसी ने अपने बयान में कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है, जहां अलग-अलग धर्मों और समुदायों की मान्यताओं का सम्मान किया जाता है। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि जिस तरह राष्ट्रीय प्रतीकों को देश की संस्कृति और भावनाओं से जोड़कर देखा जाता है, उसी प्रकार गाय को भी राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उनका कहना था कि इससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाएगा और धार्मिक भावनाओं को सम्मान मिलेगा।

सोशल मीडिया पर बयान बना चर्चा का विषय

यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इस मांग का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं। वायरल वीडियो और पोस्ट के जरिए यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। कई यूजर्स का कहना है कि यह विषय देश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है, जबकि कुछ लोग इसे संवेदनशील मुद्दा बता रहे हैं।

पहले भी उठ चुकी हैं ऐसी मांगें

देश में पहले भी कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठती रही है। समय-समय पर इस मुद्दे पर विभिन्न मंचों से बयान सामने आते रहे हैं। हालांकि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन सूफी कशिश वारसी के बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन गया है।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बढ़ी हलचल

सूफी कशिश वारसी के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि इस तरह की मांगें धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी होती हैं, इसलिए इन पर व्यापक स्तर पर संवाद की आवश्यकता है। वहीं, कुछ संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट रुख सामने लाने की मांग भी की है। आने वाले दिनों में यह विषय और अधिक राजनीतिक एवं सामाजिक बहस का केंद्र बन सकता है।