मुरादाबाद

बेबस मां के सामने दम तोड़ रही मासूम,खबर पढ़ कर नहीं रोक पायेंगे अपने आंसू

गुलनाज को तीन दिन पहले आदमखोर कुत्तों ने हमला कर जख्मी कर दिया था। डॉक्टरों ने उसकी गम्भीर हालत देखते हुए इलाज में असमर्थता जाहिर कर दी।
2 min read
moradabad
बेबस मां के सामने दम तोड़ रही मासूम,खबर पढ़ कर नहीं रोक पायेंगे अपने आंसू

मुरादाबाद: घर की बगिया में बच्चे उस फुलवारी की तरह होते हैं। जिन्हें देख हर कोई मुस्कुराता है। हर मां-बाप अपने बच्चों में जिन्दगी का हर लम्हा जीता है। लेकिन जब मां-बाप के सामने उसका फूल जैसा बच्चा जिन्दगी के लिए सांसे भर रहा हो,खुद मां-बाप को भी पता हो ये सांसे उधार की हैं न जाने कब थम जाए। ऐसे मां-बाप के दिल पर क्या बीत रही होगी। शायद शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। लेकिन ऊपर लिखी लाइनें उतनी ही सच हैं। जितनी इस समय इस खबर को पढ़ते समय आप महसूस कर रहे हैं। जी हां कुछ यही तस्वीर बयां कर रही है आवारा कुत्तों का शिकार हुई पांच साल की गुलनाज और उसके परिवार की बेबसी। धरती के भगवानों ने जबाब दे दिया तो अब सिर्फ हर पल आंसुओं के साथ दुआओं का मजमा लगा है।

तीन दिन पहले कुत्तों ने बनाया था शिकार

दरअसल कुंदरकी थाना क्षेत्र के पांडिया गांव की रहने वाली पांच वर्षीय गुलनाज को तीन दिन पहले आदमखोर कुत्तों ने हमला कर जख्मी कर दिया था। बाग में आम लेने जा रही गुलनाज को स्थानीय लोगों ने बमुश्किल कुत्तों के हमले से जख्मी हालत में बचाया था और इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। कुत्तों के हमले से गुलनाज के चेहरे, गले और सीने पर जख्म ज्यादा गहरे थे और जख्मों से खून ज्यादा बहने के चलते डॉक्टरों ने उसे मुरादाबाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया। मुरादाबाद में दो दिन इलाज के बाद भी गुलनाज की हालत में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने उसे हायर सेंटर ले जाने को कहा। परिजन गुलनाज को मेरठ ले गए जहां डॉक्टरों ने उसकी गम्भीर हालत देखते हुए इलाज में असमर्थता जाहिर कर दी। परिजनों के मुताबिक डॉक्टरों ने उन्हें बच्ची को वापस घर ले जाने को कहा। बच्ची को लेकर वापस अपने गांव पहुंचे परिजन किसी चमत्कार की उम्मीद लगाएं हुए है।

चेहरे और गर्दन पर घाव से बचना होता है मुश्किल

डॉक्टरों के मुताबिक चेहरे और सीने पर काटने के चलते गुलनाज हाइड्रोफोबिया का शिकार हो गयी है ऐसे मरीजों को बचाया जाना मुमकिन नहीं होता है। डॉक्टरों के मुताबित हाइड्रोफोबिया का वायरस चेहरे और सीने पर कुत्ते के काटने से तेजी से दिमाग पर असर डालना शुरू करता है। आदमखोर कुत्तों के हमले से जनपद में पिछले साल एक दर्जन से ज्यादा मासूमों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। फिलहाल मासूम बच्ची के परिजन पल पल मर रही बच्ची के लिए बेचैन हैं।

कुत्तों की रोकथाम का नहीं बना प्लान

आवारा कुत्तों के काटने से रोजाना सरकारी अस्पताल में तीस से चालीस लोग पहुंच रहे हैं। जबकि नगर निगम और स्थानीय निकाय इनकी नसबंदी नहीं कर रहा,जिसका खामियाजा गुलनाज जैसे न जाने कितनों को भुगतना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कुत्तों से बचाव के लिए क्या प्लान बनाया जाए उस पर विचार तक नहीं किया है।

Published on:
20 May 2018 10:41 pm
Also Read
View All
मुरादाबाद में मोमबत्ती फैक्ट्री में भीषण आग, खौफ के मारे घरों से बाहर भागे लोग, 6 जिलों की दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा

सपना चौधरी मुरादाबाद केस में कोर्ट का बड़ा एक्शन: पुलिस को आखिरी चेतावनी, रिपोर्ट नहीं आई तो होगी कार्रवाई

अदीला हत्याकांड: 24 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर आरोपी गुलफाम, पूछताछ में बोला- चप्पल मारी तो गोलियों से भून डाला

Moradabad Adila Murder Case: मुरादाबाद की अदीला मर्डर मिस्ट्री का खुलासा! जिस पति को गिफ्ट की थी थार, उसी ने गोली मारकर नहर में फेंका शव

‘इंस्टाग्राम से मुलाकात के बाद मौत तक’, पीतल कारोबारी की बेटी की क्या है इनसाइड स्टोरी? निकाह के बाद की थी थार गिफ्ट