
जय प्रकाश@पत्रिका
मुरादाबाद: शहर से सटे मात्र 3 किलामीटर की दूरी पर स्थित सैदपुर गांव में मोदी सरकार की हर गांव और घर को रोशन करने के लिए चलायी जा रही सौभाग्य योजना के बावजूद सैदपुर गांव में पिछले कई सालों से बिजली से कोसो दूर है और ये योजना भी गांव की अंधेरी तकदीर रोशन नहीं कर पायी है। आलम ये है कि गांव में लड़के और लड़कियों के शादी के रिश्ते और शादी में भी सबसे बड़ी अडचन बिजली ही बन रही है। घर में रखे बिजली के सामान ज्यादातर कबाड़ बन चुके हैं या फिर उनका इस्तेमाल ही नहीं होने से यूं ही पैक पड़े हैं। जब पत्रिका टीम ने गांव का जायजा लिया तो वाकई हैरानी हुई कि बिजली के तार खींचे होने के बावजूद भी उनमें आज तक करंट नहीं दौड़ा है। फिलाहल अब अधिकारी जल्द विधुत आपूर्ति शुरू करने की बात कर रहे हैं।
ये हैं हालात
शहर से मात्र 3 किलोमीटर दूर इस्लामनगर पंचायत के गांव सैदपुर खद्दर गांव में पक्के मकान के साथ साथ घरों में बिजली से चलने वाले उपकरण जैसे टीवी फ्रिज कूलर वाशिंग मशीन पंखे आदि जैसी सुख सुबिधाओं की सभी चीजें बिजली के इन्तजार में इधर उधर कोनों में और ताक पर रखे है। कुछ सामानों की पैकिंग तक नहीं खुल पायी है। फ्रिज और कूलर में अलमारी की तरह सामान रखा जा रहा है। बिजली के अभाव में गांव के सभी महिलाएं व पुरूष बदत्तर जिंदगी जी रहे हैं, तो बच्चे पढ़ नहीं पा रहे। तीन साल पहले इस गांव में ब्याह कर आई मोनिका के मां-बाप ने बिजली से चलने वाले सभी सामान जिसमे फ्रिज कूलर टी वी वाशिंग मशीन आदि देकर विदा किया था, लेकिन मोनिका को मिला ये सभी सामान कहीं किसी कोने में तो कहीं टाक पर रखा हुआ है। मोनिका को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उसे अभी भी निजली का इन्तजार है वो चाहती है जल्दी से लाइट आ जाए।
शादी में भी होती है दिक्कत
ग्राम वासियों का कहना है इतना ही नहीं बिजली नहीं होने से सबसे बडी दिक्कत लड़के लड़कियों की शादी में आ रही है। अगर जिस लड़के की शादी हो भी गयी तो उसका शादी में मिलने वाला बिजली से चलने वाला सामान गांव में लाइट न होने की बात कहकर रोक लिया जता है। गांव की एक महिला ने तो यहां तक कहा कि लड़कियों की शादी तो किसी तरह हो जाती है। लेकिन गांव में बिजली न होने की वजह से लड़कों के रिश्ते टूट तक जाते हैं। गांव में कुछ घरों में सोलर का सहारा है जिससे उनके घरों में तो सिर्फ रौशनी हो जाती है जबकि बाकी लोग मिट्टी तेल और डीजल की डिबिया जलाई जलाकर बिना बिजली के काम चला रहे हैं। जिसकी वजह से पढने वाले बच्चे जल भी चुके हैं जिनके शरीर पर जले के निशान आज भी मौजूद हैं।
कई बार कर चुके शिकायत
ग्राम वासियों के अनुसार उनके नसीब में लाइट है ही नहीं ,उनके द्वारा सांसद विधायक से लेकर विभागीय अधिकारियों से मिलकर गांव में बिजली सप्लाई शुरू करने की गुहार लगा चुके हैं। यहां तक कि धरना भी दे चुके हैं लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद गांव वालों की कोई सुनने वाला नहीं है।
ग्रामीणों ने ये लगाए आरोप
मुख्य सड़क पर लगा लाखों का ट्रांसफार्मर गड्ढे में पड़ा है। लेकिन कोई देखने वाला नहीं। लाइट न होने की वजह से यहां चोरियां भी होती रहती हैं बिजली के तारों पर जंगली बेल उग आई हैं। गांव वालों का कहना है कि जब गांव में बिजली के खंभे लगाने की बात आई तो गांव वालों से बिजली विभाग के लोगों ने 10 हजार रुपए भी ले लिए और गांव में दो खम्भे खड़े करके खाना पूर्ती कर दी। आरोप है कि उनसे बार बार पैसों की डिमांड की जा रही है। फिलहाल गांव वाले गांव से मात्र एक किलोमीटर दूर शहर जाकर चार्जिंग वाली लाइट चार्जिंग के लिए सुबह ले जाते हैं और शाम को लाकर घर में रौशनी करने को मजबूर हैं इस दौरान गांव वालों में सरकार के प्रति गुस्सा भरा पड़ा है।
अधिकारी जल्द आपूर्ति का कर रहे दावा
गांव के बदतर हालात के बारे में जब बिजली विभाग के मंडल अधिकारियों को जानकारी दी तो हड़कंप मच गया और अधिकारी संज्ञान में आने के बाद एक हफ्ते के अंदर गांव में बिजली पहुंचाने की बात बोल रहे हैं। यही नहीं आनन फानन में कॉन्ट्रेक्टर को भी दीपावली से पहले गांव में बिजली सप्लाई शुरू करने के लिए निर्देशित करने की बात कह रहे हैं। अधीक्षण अभियंता विधुत वितरण मंडल संजय कुमार गर्ग ने कहा कि गांव में जल्द से जल्द बिजली पहुंचाने का काम किया जायेगा। वहीँ इतने सालों से गांव में बिजली क्यों नहीं आई इसका जबाब किसी के पास नहीं है।