किसानों ने मंडियों में सब्जियों और फलों की सफ्लाई पूरी तरह बन्द कर दी है। साथ ही दूध और अन्य खाद्य पदार्थो की आपूर्ति रोक दी गयी है।
मुरादाबाद: पिछले तीन दिनों से देश के कई राज्यों में चल रहा किसान आंदोलन धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। किसानों ने मंडियों में सब्जियों और फलों की सफ्लाई पूरी तरह बन्द कर दी है। साथ ही दूध और अन्य खाद्य पदार्थो की आपूर्ति रोक दी गयी है। किसानों के इस विरोध प्रदर्शन का असर अब धीरे धीरे नजर आने लगा है। शहर की मंडियों में सब्जी की आवक घटी है साथ ही दाम भी बढ़ रहे हैं। जबकि किसानों के तेवर बिलकुल भी ढीले नहीं पड़ रहे हैं। आज भी जनपद के अलीगढ़-आगरा हाइवे पर आज किसानों ने जमकर प्रदर्शन किया और दूध और फल सड़कों पर फेंककर विरोध जताया।
नवविवाहिता के मुंह पर टेप और हाथ-पैर बांधकर बनाया बंधक, पुलिस ने छुड़ाया-देखें वीडियो
स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की मांग
मुरादाबाद और सम्भल जनपद की सीमा पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे किसानों का आरोप है की सरकार किसानों की लगातार उपेक्षा कर रही है। किसानों की मांग है की सरकार जल्द ही स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करें और किसान क्रेडिट कार्ड पर किसानों के लिए कर्ज को माफ किया जाय। केंद्र सरकार पर लगातार उपेक्षा का आरोप लगाते हुए किसानों का कहना है की मोदी सरकार ने 2014 चुनावों से पहले किसानों को हरसम्भव सहायता दिलाने का वादा किया था।सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए किसानों ने आज सड़कों पर फल और सब्जियां फेंकी। किसानों ने बाजार में सफ्लाई के लिए रखे दूध को भी सड़कों पर बहा दिया।
सरकार ने किया था वादा
किसान नेता चौधरी हरपाल सिंह ने कहा कि सरकार को किसानों को उनकी फसल का बाजिब मूल्य दिलाना होगा। उसने वादा किया था,आज अकेले मुरादाबाद मंडल में ही चीनी मीलों पर करोड़ों का बकाया है। शासन प्रशासन मिलकर किसानों का उत्पीडन कर रहा है। इसलिए मजबूरन किसान को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। अभी आन्दोलन भले ही सभी को धीमा लग रहा है। लेकिन जैसे जैसे आगे बढेगा तब आम लोगों को भी किसानों का दर्द समझ आयेगा।
आगे होगा तीव्र आन्दोलन
उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों की मांग पर ध्यान नहीं दिया तो किसान जल्द ही कोर्ट की शरण भी लेगी और उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होगी। किसानों का कहना है कि गांवो से बाजार और मंडियों को खाद्य पदार्थो की सफ्लाई पूरी तरह बन्द कर दी गयी है। दस जून तक चलने वाले आंदोलन के दौरान किसान मंडियों को खाद्य पदार्थ और दूध की सफ्लाई पूरी तरह बन्द रखेंगे।