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ईवीएम पर फिर उठे सवाल, सपा नेता एसटी हसन ने लगाया बड़ा आरोप, गठबंधन को बताया हार का बड़ा कारण

ST Hasan Statement: मुरादाबाद में सपा नेता एस.टी. हसन ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए बायोमेट्रिक वोटिंग की मांग की है। साथ ही उन्होंने विपक्षी एकता की कमी को चुनावी हार का कारण बताते हुए गठबंधन रणनीति पर भी टिप्पणी की।

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ईवीएम पर फिर उठे सवाल | Image - X/@IANS

EVM Biometric Voting: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एस.टी. हसन ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं और यह मुद्दा केवल भारत में ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय रहा है।

एस.टी. हसन ने दावा किया कि भारत को छोड़कर दुनिया के कई देशों ने ईवीएम प्रणाली को अपनाने से इनकार किया है, जिसके पीछे निश्चित रूप से कोई न कोई कारण है। उनके अनुसार आधुनिक तकनीक के इस दौर में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ईवीएम को हैक किया जा सकता है या नहीं।

बायोमेट्रिक मतदान की वकालत

सपा नेता ने आगे कहा कि मतदान प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली को अपनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि मतदान को आधार या बायोमेट्रिक पहचान से जोड़ा जाए तो फर्जी मतदान की संभावना लगभग समाप्त हो सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में ई-वोटिंग प्रणाली लागू की जाती है तो चुनावी प्रक्रिया और अधिक स्पष्ट तथा भरोसेमंद बन सकती है। उनके अनुसार तकनीक का सही उपयोग लोकतंत्र को मजबूत करेगा, न कि उसे कमजोर।

बयान से फिर शुरू हुई राजनीतिक बहस

एस.टी. हसन के इस बयान के बाद एक बार फिर ईवीएम और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों में इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है, जबकि चुनावी प्रणाली के समर्थक ईवीएम को सुरक्षित और प्रभावी बताते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में तकनीक आधारित मतदान प्रणालियों और उनके भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।

गठबंधन की कमी को बताया हार का बड़ा कारण

इसी बीच एस.टी. हसन ने विपक्षी दलों की एकता को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कुछ क्षेत्रों में चुनाव नहीं लड़ा, जिसका असर परिणामों पर पड़ा। उनके अनुसार कई सीटों पर केवल 5,000 वोट भी चुनाव का परिणाम बदल सकते हैं।

एस.टी. हसन ने आगे कहा कि कांग्रेस ने पूरा चुनाव अकेले लड़ा, जबकि यदि कांग्रेस, ममता बनर्जी और असदुद्दीन ओवैसी के बीच गठबंधन होता तो चुनावी नतीजे काफी अलग हो सकते थे। उनके मुताबिक विपक्षी एकता की कमी ने सीटों के बंटवारे और अंतिम परिणाम पर बड़ा असर डाला।

राजनीतिक बयान से बढ़ी सियासी हलचल

एस.टी. हसन के इन बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में फिर से बहस तेज हो गई है। एक तरफ ईवीएम और मतदान प्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन की रणनीति और एकता पर भी चर्चाएं बढ़ गई हैं।