मुरादाबाद

रेलवे कर्मी से 37 दिन में 65 बार ठगी, सेबी एडवाइजर बन दिया ये लालच, लूटे 1.27 करोड़

Moradabad Crime: यूपी के मुरादाबाद में रेलवे कर्मी से 37 दिन में 65 बार ठगी हुई। फर्जी सेबी एडवाइजर बन ठगों ने 1.27 करोड़ अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए। ठगों ने यूट्यूब के जरिए पहले व्हाट्सएप चैट शुरू की फिर लालच देकर रुपये ऐंठ लिए।

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Moradabad Crime News

Moradabad Crime News: साइबर ठगों ने यूपी के मुरादाबाद में मझोला थाना क्षेत्र निवासी रेलवे कर्मचारी को शेयर मार्केट से मोटा मुनाफा कराने का झांसा देकर 1 करोड़ 27 लाख 30 हजार 97 रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। रेलवे कर्मचारी के पास एक युवक ने खुद को सेबी एडवाइजर बताकर मुनाफा कराने का झांसा देकर ठगी की। ठगी करने के बाद से युवती का मोबाइल नंबर बंद आ रहा है। शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मझोला क्षेत्र के मिलन विहार निवासी व्यक्ति रेलवे में सीनियर टेक्निशियन के पद पर तैनात हैं। उन्होंने तहरीर देकर बताया कि 15 जून को यूट्यूब चैनल पर शेयर मार्केट से संबंधित एक वीडियो देखा था। उस वीडियो में दिए गए लिंक पर क्लिक किया तो एक वाट्सएप नंबर से उनकी चैटिंग शुरू हो गई। चैट करने वाली युवती ने खुद का नाम दीपिका बुंदेला बताया और कहा कि वह सेबी एडवाइजर है। कुछ दिन बाद उसी युवती ने वाट्सएप कॉल करके उनसे संपर्क किया।

रेलकर्मी से कहा कि हमारे बताए शेयर किसी अन्य एप से खरीदोगे तो बहुत मुनाफा होगा। उसकी बातों में आकर रेलकर्मी ने ग्रो एप से शेयर खरीदा, जिसमें मुनाफा भी हुआ। बाद में युवती ने एक वेबसाइट लिंक भेजा और कहा कि इसमें निवेश करने से अधिक रिटर्न मिलेगा। बाद में उसके द्वार भेजे गए धनप्रो डॉट कॉम नाम की वेबसाइट खोलकर उसमें पैसे डालना शुरू कर दिया।

इसके बाद रेलकर्मी ने अलग-अलग तारीख पर खुद के साथ ही पत्नी, बेटी, बहन ओर भाई के खाते से उस वेबसाइट पर दिए गए खातों में कुल 1 करोड़ 27 लाख 30 हजार 97 रुपये जमा कर दिए। जब अपनी रकम निकालने का प्रयास किया तो एक भी रुपये नहीं निकला, जिसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ। साइबर थाना प्रभारी मोहित कुमार ने बताया कि तहरीर के आधार पर ठगी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।

रेलवे कर्मचारी साइबर ठगों के जाल में इस कदर फंसे कि बिना सोचे विचारे पैसे जमा करते रहे। दर्ज कराई गई रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि 25 जून से 31 जुलाई के बीच कुल 37 दिन में उन्होंने 65 बार आरोपी की बताई वेबसाइट पर रुपये ट्रांसफर किए। कभी पांच हजार तो कभी एक लाख, चार लाख और पांच लाख रुपये तक उसमें डाले।

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