
मुरादाबाद. कृषि कानूनाें के खिलाफ ढाई महीने से ज्यादा समय से किसानों का दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलन जारी है। किसान नेताओं और सरकार के बीच कई दौर की वार्ता के बाद भी सहमति नहीं बन सकी है। किसान नेताओं का दो टूक कहना है कि सरकार एमएसपी पर कानून बनाए और तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। भाकियू नेता राकेश टिकैत जहां गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों में जोश भर रहे हैं, वहीं उनके बड़े भाई और भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत जगह-जगह महापंचायत कर किसानों को एकजुट कर रहे हैं। इसी बीच मुरादाबाद के बिलारी में हुई पंचायत में पहुंचे नरेश टिकैत ने किसान आंदोलन को समाप्त करने का फॉर्मूला दिया है।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत का कहना है कि केंद्र सरकार अपने अड़ियल रूख को छोड़कर किसानों के मान-सम्मान से खिलवाड़ नहीं करे तो मुद्दा सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा यह सब अब सरकार पर ही निर्भर करता है। उन्होंने आगे कहा कि खेती अब घाटे का सौदा है, सरकार कहती है कि हमें इससे लाभ होगा। हमें अपने नफा और नुकसान के बारे सब पता है। इसलिए वह इस तरह अड़ियल रुख न अपनाए। वहीं किसान आंदोलन को विदेशियों के समर्थन पर टिकैत ने कहा कि विदेशियों से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। हम तो यही कहेंगे कि यहां की बातें विदेशों में भी होती है। इससे सरकार की किरकिरी हो रही है तो ऐसी नौबत ही क्यों लाई जा रही है?
बता दें कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ भारतीय किसान संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर जगह-जगह महापंचायतों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि आंदोलन को मजबूती मिले और सरकार उनकी सभी मांगें मान ले। इसी कड़ी में मुरादाबाद के कस्बा बिलारी में भी एक महापंचायत का आयोजन हुआ। इस महापंचायत में मुरादाबाद के अलावा पड़ोसी जिले अमरोहा और संभल के साथ रामपुर व बदायूं के किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए।