Online Gaming Addiction: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में ऑनलाइन गेमिंग की लत ने युवाओं को आर्थिक और मानसिक संकट में डाल दिया है। सात महीनों में करीब एक हजार युवाओं ने 50 लाख रुपये गंवा दिए। कई परिवार कर्ज और तंगी से जूझ रहे हैं।
Online gaming addiction youth loss 50 lakh in Moradabad: यूपी के मुरादाबाद में ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming) की लत युवाओं के लिए किसी जानलेवा जाल से कम साबित नहीं हो रही है। बीते सात महीनों में जिले के करीब एक हजार युवा कुल 50 लाख रुपये हार चुके हैं। इस लत ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को हिला दिया, बल्कि परिवारों को भी मानसिक तनाव और तंगी की स्थिति में ला खड़ा किया। कई घरों में पढ़ाई-लिखाई और रोजगार जैसी बुनियादी चीजों पर असर पड़ रहा है।
ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming) की बढ़ती समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस पर सख्त कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि कानून लागू होने के बाद इस लत पर रोक लगेगी और परिवारों को आर्थिक व मानसिक संकट से बाहर निकलने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि नया कानून गेमिंग कंपनियों को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए बाध्य करेगा, ताकि ठगी की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई कर सके।
शहर के हजारों युवा दिन-रात मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर गेमिंग में डूबे रहते हैं। यह आदत न केवल उनकी पढ़ाई और करियर को प्रभावित कर रही है बल्कि परिवारों में तनाव का माहौल भी पैदा कर रही है। कई युवाओं ने तो कर्ज लेकर या अपनी जमा पूंजी तक दांव पर लगाकर पैसा गंवा दिया।
साइबर पुलिस के अनुसार जिले में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें युवाओं को निवेश और जीत का लालच देकर ठगा गया। एक बार रुपये लगाने के बाद उन्हें वापस नहीं किया गया। पुलिस जब कंपनियों से पूछताछ करती थी तो वे गेमिंग की जीत बताकर रकम को छिपा देती थीं। कंपनियों के बिना रजिस्ट्रेशन के चलते पुलिस कार्रवाई करने में असमर्थ रहती थी।
सिविल लाइंस क्षेत्र के हरथला निवासी एक युवक ने ऑनलाइन गेम (Online Gaming) डाउनलोड किया और शुरुआती दौर में 2 हजार रुपये जीत भी लिए। लेकिन जैसे ही उसने 80 हजार रुपये दांव पर लगाए, उसके पैसे वापस नहीं किए गए। ठगी का शिकार बने युवक ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। ऐसे सैकड़ों केस पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नया कानून कड़ाई से लागू हुआ तो गेमिंग कंपनियों पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा। साथ ही, अगर कोई कंपनी ठगी करती है तो पुलिस उनसे जानकारी मांग सकेगी और दोषियों पर कार्रवाई संभव होगी। इससे युवाओं को ठगी से बचाने में मदद मिलेगी और परिवारों को राहत मिलेगी।