
योगी सरकार का सख्त एक्शन.. यह सांकेतिक तस्वीर है।
Moradabad mass marriage scam: मुरादाबाद में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सामने आए घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। जांच में खुलासा हुआ कि पहले से विवाहित महिलाओं को दस्तावेजों में “कुंवारी” दिखाकर योजना का लाभ दिलाने की कोशिश की गई। इस पूरे मामले में पांच ग्राम विकास अधिकारियों को दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मूंढापांडे ब्लॉक में तैनात ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) रवि कुमार, रविपाल, रणवीर सिंह, शादाब अली और अमित कुमार को जांच में दोषी पाया गया। जिला विकास अधिकारी गोविंद बल्लभ पाठक ने इन्हें निलंबित करते हुए विकास खंड ठाकुरद्वारा से संबद्ध कर दिया है। इनके खिलाफ विभागीय जांच की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारी उमाकांत को सौंपी गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
पंचायती राज विभाग के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी धनेन्द्र पाल सिंह और रजत पुष्कर पहले से अन्य मामलों में निलंबित चल रहे हैं। इस प्रकरण में भी जांच टीम ने उन्हें दोषी माना है। आरोप है कि इन्होंने शादीशुदा जोड़ों के दस्तावेजों का सत्यापन कर उन्हें योजना में शामिल किया।
वहीं ग्राम पंचायत विकास अधिकारी मोहन सिंह रावत को भी निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) भगतपुर टांडा मनोज कुमार सिंह को सौंपी गई है।
डीपीआरओ के अनुसार इस मामले में दोषी पाए गए ग्राम पंचायत विकास अधिकारी इंतजार हुसैन 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन इस मामले में सेवानिवृत्ति को ढाल नहीं बनने देना चाहता।
जांच में कुंदरकी ब्लॉक के डींगरपुर गांव की सीमा परवीन का नाम भी सामने आया है। बिना सही सत्यापन और फील्ड जांच के फाइलों को आगे बढ़ाने का आरोप है। सचिव को नोटिस जारी किया गया है। वहीं मूंढापांडे के खंड विकास अधिकारी अशोक कुमार की भूमिका भी जांच के दायरे में है, हालांकि वे अभी पद पर बने हुए हैं। एडीओ समाज कल्याण प्रशांत कुमार को हटाकर मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। अन्य ब्लॉकों के सहायक विकास अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी है।
जिला विकास अधिकारी द्वारा गठित 30 अधिकारियों की टीम ने जब रिकॉर्ड खंगाले तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। करनपुर, लालपुर तीतरी, अहरोला, शिवपुरी, गढ़ी केहड़ा, खरगपुर जगतपुर, सकटू, हिरन खेड़ा, दौलारी, बिसाहट, घोंडा, भड़ासना, भीत, भीत खेड़ा, खबड़िया भूर और दुपेड़ा समेत कई गांवों की महिलाओं के नाम दस्तावेजों में दर्ज मिले। जांच में पाया गया कि इनमें से कई महिलाएं वर्षों से विवाहित हैं और अपने पति व बच्चों के साथ रह रही हैं, फिर भी उन्हें योजना में “कुंवारी” दर्शाया गया।
रिकॉर्ड में कई नामों के सामने उपस्थिति शीट में “गैरहाजिर” दर्ज था, इसके बावजूद उनके खातों में धनराशि ट्रांसफर करने की योजना बनाई गई। कई मोबाइल नंबर अधूरे या गलत पाए गए और कुछ खातों में एक जैसी प्रविष्टियां दर्ज थीं। इससे स्पष्ट है कि बिना वास्तविक उपस्थिति और सत्यापन के ही फाइलों को आगे बढ़ाया गया। यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।
सरकारी नियमों के अनुसार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को लगभग एक लाख रुपये की सहायता दी जाती है। यदि दर्जनों अपात्र जोड़ों को लाभ दिलाने की योजना सफल हो जाती तो यह घोटाला लाखों से बढ़कर करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता था। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अभी वित्तीय नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत इस मामले में त्वरित कार्रवाई की गई है। अधिकारियों के निलंबन और व्यापक जांच से विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। शासन का स्पष्ट संदेश है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और भी अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
Published on:
11 Feb 2026 05:40 pm
