बेहद तंगहाली में जी रहे एक परिवार की कच्ची छत भी गिर गयी,जिसमें परिवार का मजदूर मुखिया भी मर गया।
मुरादाबाद: गरीबों के कल्याण के लिए सरकारें भले ही कितनी योजनायें चला ले,लेकिन सही पात्र तक योजना का लाभ तो दूर उसका अंश पहुंचना अभी भी पहाड़ खोदने जैसा ही है। जी हां कुछ ऐसा ही मामला आज कुन्दरकी थाना क्षेत्र में आया है। यहां बेहद तंगहाली में जी रहे एक परिवार की कच्ची छत भी गिर गयी,जिसमें परिवार का मजदूर मुखिया भी मर गया। हैरानी तब हुई जब जांच को पहुंचे अधिकारी ने कहा ये परिवार दैवीय आपदा राहत का अधिकार नहीं रखता। जबकि पीड़ित परिवार अब सिर्फ ऊपर वाले से चमत्कार की ही उम्मीद लगाये बैठे हैं।
कच्चे मकान में रहता था मजदूर
थाना कुन्दरकी क्षेत्र अंतर्गत कायस्थान इलाके में कच्चे मकान में गरीब मजदूर रहमत अपने परिवार के साथ रहता था। पिछले दिनों हुई बरसात के कारण कच्चे मकान की मिटटी की दीवारे जर्जर हो गयी थी। अचानक जब पूरा परिवार गहरी नींद में अपने इस कच्चे आशियाने में सो रहा था, तभी तडके भरभराकर जर्जर हो चुकी दीवार गिर पडी और पूरा परिवार मलबे में दब गया। मकान गिरने की तेज आवाज से आस पड़ोस के लोग भी जाग गए और तुरंत पूरे परिवार को मलबे से बाहर निकाला।
मजदूर की मौत
इस हादसे में रहमत और उसकी बेटी घायल हो गए थे। जिसमे रहमत की गंभीर हालत देखते हुए लोगों ने अस्पताल की ओर दौड़ लगा दी ,लेकिन रहमत की जान नहीं बच सकी। जिससे पूरे परिवार में मातम पसर गया।
ये बोले अधिकारी
सूचना पर तहसीलदार राजेश कुमार भी मौके पर पहुंच गए तो उनका कहना था कि लेखपाल और कानून गो की रिपोर्ट के आधार पर ये देवीय आपदा के पात्र नहीं हो सकते। परन्तु ये गरीब आदमी हैं तो इन्हें आवास दिलाया जाएगा।
योजनाओं पर सवाल
लेकिन अभी दो दिन पहले ही जनपद मुरादाबाद को ODF का प्रमाण पत्र दिया गया है। जिसकी पोल इस घटना ने खोल कर रख दी है।तहसीलदार खुद कहते नजर आ रहे हैं कि शौचालय की भी आवश्यकता है। उसे भी बनवाकर दिया जाएगा।राशन कार्ड नहीं है उसे भी बनवाकर दिया जाएगा। मतलब साफ़ है हादसे के बाद सभी योजनाओं का लाभ मिल सकता है लेकिन उसके लिए मौत का इन्तजार जरुरी है।