UP Crime News: यूपी के मुरादाबाद में ट्रिपल 888 तमंचा गैंग में 20 से 30 साल तक के युवा शामिल हैं। रियासत से तमंचा होलसेल रेट पर लेने के बाद यह क्वालिटी बताकर आगे सप्लाई कर देते थे। इसमें इन्हें तीन से पांच हजार रुपये एक दिन में बच जाते थे। एक माह में अगर 20 तमंचे भी बेच दिए तो 60 हजार रुपये की कमाई हो जाती थी। इसका लालच ही युवाओं को जोड़ रहा था।
UP Crime News Today: तमंचा फैक्ट्री से बल्क में तमंचे खरीदे फिर युवाओं को मोटे मुनाफे का लालच देकर बिकवा दिए। शनिवार को मुरादाबाद जिले के थाना मझोला पुलिस ने ऐसे ही एक गैंग के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जिसमें एक 50 वर्षीय तो बाकी 20-30 साल की उम्र के युवा शामिल हैं। इनके पास से पुलिस ने बड़ी संख्या में बने-अधबने तमंचे समेत उपकरण भी बरामद किये हैं।
मुरादाबाद एसपी सिटी रणविजय सिंह ने बताया कि सतेंद्र प्राइवेट यूनिवर्सिटी से बीएससी कर रहा है। परिवार में भी कुछ खास कारोबार भी नहीं है। फिल्में देखकर गैंग बनाकर दबंगई करने का शौक उसे जरायम की दुनिया में काफी दूर तक ले आया। इसके लिए उसने इंटरनेट मीडिया का सहारा लिया और ट्रिपल 888 गैंग बना डाली। अंधे के नाम से मशहूर रियासत से दुष्यंत, समीर, साहिल के माध्यम से संपर्क किया।
प्लान के अनुसार तय किया कि तमंचे (अवैध असलाह) रियासत के साथ मिलकर बनाए जाएंगे। इसके बाद नमूने के लिए एक-एक तमंचा सभी लोग अंटी में लगाकर रखते थे। जिससे ग्राहक को दिखाकर सौदा हाथों हाथ कर लिया जाए। तमंचों की बिक्री धड़ल्ले से शुरू हो गई।
आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ ही हर दिन ब्रांडेड कपड़े, जूते आदि बदलने से लोगों की निगाह में भी चढ़ने लगे। किसी ने कुछ बोल दिया तो उसे तमंचा दिखाकर इशारा कर दिया कि यहां से निकल लो… नहीं तो फिर काम खराब हो जाएगा। इतना देखने के बाद हर कोई पिंड काटकर निकल जाता था। इंटरनेट मीडिया की इंस्टाग्राम आइडी पर युवाओं को जोड़ने का क्रम भी जारी रहा। नंबर लेने के बाद उनसे बातचीत भी शुरू हो जाती थी।
मुरादाबाद जिले के लाकड़ी फाजलपुर के 50 वर्षीय रियासत पुत्र अल्लाहबख्श, चामुंडा के पास पुराना लाकड़ी फाजलपुर के 20 वर्षीय साहिल पुत्र आबिद हुसैन, लाइनपार केजीके कालेज विकास नगर के 30 वर्षीय दुष्यंत पुत्र राजेंद्र सिंह, बिलारी के अहरोला मल्लपुर के 23 वर्षीय अमन पुत्र देवेंद्र, रामपुर सैफनी जटपुरा के 23 वर्षीय सतेंद्र पुत्र सुरेंद्र को गिरफ्तार किया गया है।
इनके पास से 20 देसी तमंचे, जिनमें तीन 12 बोर, 17 तमंचे 315 बोर, 30 अधबने देसी तमंचे व बैरल, 73 अदद वैल्डिंग राड डिब्बी, एक ड्रिल मशीन, दो ग्लाइंडर मशीन, 70 फायरिंग पिन, 25 तमंचे बनाने में इस्तेमाल होने वाली स्प्रिंग, कारतूस बनाने वाली डाई, एक खैरात मशीन, एक पेंट करने वाली स्प्रे, लोहे की चाप व चाप में प्रयोग होने वाली डिजाईनदार कटी लकड़ी, एक ब्लोअर भट्टी, दो 12 बोर के कारतूस, दो 315 बोर के कारतूस, एक कारतूस 32 बोर, तीन खोखे 315 बोर कारतूस, एक खोखा 32 बोर कारतूस, शस्त्र बनाने की सामग्री एवं उपकरण बरामद हुए हैं।