मुरैना

पशुपतिनाथ मेला में मनमानी वसूली फिर भी दुकानदारों स्वयं के पैसों से डलवा रहे मिट्टी

- नगर निगम प्रशासन ने व्यवस्थाओं के नाम पर बनाई दूरियां, दुकानदारों से टीनशैड व बिजली के अलग से पैसे वसूल रहे हैं प्राइवेट लोग - नगर निगम से जिस दुकान की रेट 5200 रुपए तय की, उसका मेला में वसूला जा रहा है 16000 से अधिक रुपए
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Jan 02, 2025
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मुरैना. पशुपतिनाथ महादेव मेला कभी मुरैना की सांस्कृतिक धरोहर के नाम से जाना जाता था आज हाट बाजार बनकर रह गया है। यहां नगर निगम की आड़ में दुकानों का आवंटन प्राइवेट लोग कर रहे हैं। दुकानदारों से मनमाने पैसे वसूले जा रहे हैं, उसके बाद भी सुविधाएं स्वयं जुटा रहे हैं।
पशुपतिनाथ महादेव मेला में कई दशक से मुरैना में लगता आ रहा है लेकिन इस बार जिस तरह की अव्यवस्थाएं सामने आ रही हैं, वैसी पहले कभी नहीं दिखाई नहीं दी। दुकानदारों से मनमानी राशि वसूलने के बाद भी बारिश होने पर स्वयं दुकानदारों को मिट्टी डलवानी पड़ रही है, वहीं टीनशैड व बिजली का अलग से भुगतान करना पड़ रहा है। मेले में कुछ दुकानदार तो ऐसे हैं चार पीड़ी से लगातार मेले में दुकान लगा रहे हैं, उनको कहना हैं कि ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी जो इस बार देखी जा रही है। मेले का शुरू हुए एक महीना हो गया लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं हैं। दूर दूर से आए दुकानदार मजबूरी में अपनी दुकान लगा रहे हैं। पैसा खर्च करके दिल्ली, आगरा व बाड़ी आदि स्थानों से आए हैं, अगर वह लौटते तो भी मुश्किल है। चर्चा है कि नगर निगम के कुछ अधिकारी कर्मचारियों द्वारा अपने रिश्तेदार व परिचितों को ठेका दे दिया है, उनमें निगम के एक राजस्व विभाग के कर्मचारी का भाई भी पार्टनर बताया गया है, उनके द्वारा ही दुकानदारों से अवैध वसूली करवाई जा रही है। खबर है कि मेले में झूलों की फिटनिस नहीं हैं, अगर हादसा होता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।
एक माह बाद भी सांस्कृतिक कार्यक्रम तय नहीं
नगर निगम के मेला को शुरू हुए एक माह हो गया अभी तक सांस्कृतिक कार्यक्रम तय नहीं हैं। कवि सम्मेलन, कब्बाली, रामलीला, नुक्कड़ नाटक रंगमंच पर होते थे लेकिन अब कार्यक्रम तो दूर रंगमंच तक तैयार नहीं हुआ है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मेले के साथ साथ दुकानदारों की आय बढ़ती है लेकिन इस बार तो मेला चंद लोगों की आय का साधन बनकर रह गया है।
क्या कहते हैं दुकानदार

  • 12 बाइ 18 की जगह दुकान के लिए ली है, 40 हजार रुपए में सौदा हुआ है। अभी 5 हजार रुपए एडवांस लिया है। न टीनशैड और न लाइट है, इसके लिए अलग से देना पड़ा रहा है। मिट्टी भी अपने पैसों से डलवा रहे हैं।जितेन्द्र, दिल्ली
  • एक दुकान नौ बाई नौ की 16 हजार रुपए में मिली है। अभी तक फिलहाल एडवांस ले गए हैं। नगर पालिका की होती तो रसीद काटते, प्राइवेट लोग हैं। लाइट के 60 रुपए रोज और टीनशैड के 3500 रुपए अलग से लिए हैं।ओमवीर, दुकानदार
  • हमने 13 बाइ 5 की दुकान 18 हजार रुपए में ली है। सुविधा के नाम पर कुछ नहीं हैं, सारी व्यवस्थाएं हमको ही करनी पड़ रही हैं। दो हजार रुपए एडवांस ले लिया है और बोला है कि रसीद बाद में दे देंगे।शुभान खान, सैंया आगरा
  • हमारी दुकान 18 फीट की है, 24 हजार रुपए लिए हैं। तीन हजार रुपए लाइट के अलग से देने पड़ रहे हैं। सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं हैं। सिर्फ पीछे से टीन लगा दी है, अन्य व्यवस्थाएं स्वयं ही जुटानी पड़ रही हैं।दानिश खान, बाड़ी
  • हम चार पीड़ी से मुरैना मेले में दुकान लगाते आ रहे हैं। पहले 300 रुपए की दुकान मिलती थी, वही आज 16 से 24 हजार तक मिल रही है, वह भी कोई सुविधा नहीं हैं, पहले नगर पालिका ही व्यवस्थाएं जुटाती थी।असलम खान, धौलपुर

क्या कहते हैं जिम्मेदार

  • मेले का संचालन नगर निगम द्वारा ही किया जा रहा है। अगर प्राइवेट लोगों द्वारा वसूली की जा रही है तो हम दिखवा लेते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम पूर्व प्रधानमंत्री के निधन के चलते स्थिगित कर दिए हैं।सतेन्द्र धाकरे, आयुक्त, नगर निगम
  • मेले में 150 दुकान आवंटित हुई हैं। सबकी रसीद काटी जा चुकी हैं, आठ बाइ आठ की दुकान की निगम से 5200 रुपए कीमत फिक्स है, अगर ज्यादा वसूला जा रहा है तो पता करवा लेते हैं।दर्शन डंडोतिया, मेला अधिकारी
Updated on:
02 Jan 2025 03:24 pm
Published on:
02 Jan 2025 03:24 pm