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सड़क के लिए भाजपा सांसद के घर तक दंडवत आंदोलन, मुरैना में 13 किमी. बाद बिगड़ी युवक की तबीयत

Dandavat Protest for Road: सड़क निर्माण की मांग को लेकर करीब 30 किमी. की दंडवत यात्रा कर भाजपा सांसद शिवमंगल सिंह तोमर के घर के लिए निकले युवक नवनीत तोमर की बिगड़ी तबीयत।
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youth dandavat protest road demand, दंडवत यात्रा करते नवनीत तोमर (source-patrika)

Morena Dandavat Protest for Road: सड़क पर लेटते हैं… हाथ जोड़ते हैं… फिर उठकर जितनी जगह शरीर नापता है, उतना ही आगे बढ़ जाते हैं। कुछ ऐसी ही तस्वीर मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के अंबाह से सामने आई है। यहां दिमनी विधानसभा के जोहा पंचायत के जोहा की हवेली गांव का नवनीत तोमर नाम का युवक मंगलवार सुबह छह बजे अपने घर से करीब 30 किलोमीटर दूर बड़ागांव स्थित सांसद शिवमंगल सिंह तोमर के निवास तक कनक दंडवत यात्रा पर निकला था। लेकिन 13 किलोमीटर चलने के बाद वह बीमार हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

दंडवत यात्रा पर निकले नवनीत की तबीयत बिगड़ी

बुधवार को दंडवत यात्रा के दौरान नवनीत तोमर गोठ गांव पहुंचने पर अचानक बेहोश हो गया। परिजन और साथियों ने उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल अंबाह पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। अस्पताल पहुंचे सांसद प्रतिनिधि गौरव तोमर ने सड़क पर तत्काल दो ट्रक बोल्डर डलवाने तथा आगे निर्माण कार्य कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद नवनीत ने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा कि यदि शीघ्र सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वह गोठ गांव से दोबारा कनक दंडवत यात्रा शुरू करेंगे।

सड़क निर्माण की है मांग

दडंवत यात्रा पर निकले युवक नवनीत तोमर की मांग सिर्फ इतनी है कि दक्षापुर से जोहा की हवेली तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण तत्काल शुरू कराया जाए। यह सिर्फ एक सड़क की मांग नहीं, बल्कि उन करीब दो हजार ग्रामीणों की पीड़ा है, जो आजादी के दशकों बाद भी हर बरसात में छह महीने तक लगभग दुनिया से कट जाते हैं। जोहा पंचायत के जोहा की हवेली, झील का पुरा, दक्षापुर, सीतापुर और आम का पुरा गांव आज भी दलदलनुमा कच्चे रास्तों पर निर्भर हैं। बारिश शुरू होते ही सड़क पर दो से तीन फीट गहरे गड्ढे हो जाते हैं, बाइक तक नहीं निकल पाती। नवनीत तोमर बताते हैं कि गांव तक पहुंचने के लिए श्यामपुर, जोहा और दक्षापुर तीन रास्ते हैं, लेकिन एक भी पक्की नहीं है।

बरसात में आती हैं कई परेशानियां

नवनीत तोमर ने बताया कि बारिश के दिनों में स्कूल वाहन गांव नहीं पहुंचते, बच्चे पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं और कोचिंग पढ़ाने आने वाले शिक्षक भी आना बंद कर देते हैं। ग्रामीण बारिश शुरू होने से पहले राशन का इंतजाम कर लेते हैं, क्योंकि उसके बाद गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी तब होती है जब कोई गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा में होती है या कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में मरीजों को खाट या कंधों पर उठाकर करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक लाया जाता है, जहां से एंबुलेंस उन्हें अस्पताल ले जाती है। सड़क की मांग अधिकारियों, मंत्री, सांसद और सीएम हेल्पलाइन पर तक कर चुके हैं।