ग्वालियर चंबल संभाग में विस्फोटों से दहल जाते हैं सैलानियों के दिल थानों के सामने से हो रहा परिवहन, फिर भी जिम्मेदारों की आंखें बंद
ऋषि कुमार जायसवाल @ ग्वालियर अंचल. खनिज संपदा से लबरेज ग्वालियर-चंबल संभाग में सफेद पत्थर का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि जिम्मेदार इसे देखकर भी अनदेखा करने में लगे हैं। उनकी आंखों के सामने से पत्थरों से लदी गाडिय़ां निकल जाती है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। जितनी वैध खदानें हैं उससे ज्यादा तो अवैध खदानें चल रही है। पत्थर के अवैध खनन के चलते धरोहरों को नुकसान पहुंच रहा है। यहां आने वाले सैलानियों के दिल खदानों में होने वाले विस्फोटों से दहल जाते हैं। धमाकों की वजह से आसपास के घरों में दरारें भी आने लगी हैं। अवैध खनन के चलते करोड़ों की राजस्व हानि भी हो रही है।
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एक हजार ट्रैक्टर ट्राली रोज निकालते
जिले में पत्थर की खदानें बड़ी संख्या में संचालित हैं, लेकिन जितनी खदान वैध है, उससे कई गुना ज्यादा अवैध उत्खनन हो रहा है। पुरातात्विक और पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण पूरा स्मारकों के आसपास व्यापक पैमाने पर विस्फोट करके पत्थरों का खनन किया जा रहा है। दिन भर पत्थर से भरे वाहन रिठौरा, बानमौर, नूराबाद, माता बसैया एवं सिविल लाइन थाना क्षेत्र में आते जाते देखे जा सकते हैं। सुमावली थाना क्षेत्र में घाटीगांव की ओर से अवैध तरीके से पत्थर खोदकर दिन में एक हजार के करीब ट्रैक्टर ट्रॉली निकलती हैं।
...तो 100 करोड़ का मिले अतिरिक्त राजस्व
सुमावली में तो थाने के ठीक सामने से ही पत्थर से भरी ट्रैक्टर ट्राली का आने जाने का रास्ता है, लेकिन कभी रोक-टोक नहीं की जाती है। परिवहन पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जाए तो सालाना 100 करोड रुपए तक का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। वर्तमान में केवल खनिज विभाग के आधिपत्य वाली खदानों और ईंट भट्टों के संचालन से प्रशासन को महज 18 करोड़ रुपए मिल पा रहे हैं। सख्ती बरतने से आंकड़ा बढकऱ 100 से 120 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। पिछले दिनों वन विभाग की ग्वालियर टीम नूराबाद क्षेत्र में अचानक छापा डाला तो एक ही दिन में अवैध खदानें मिलीं। विभाग का मानना है कि अवैध खदानों की संख्या 100 से ज्यादा हो सकती है।
प्राचीन पुरा संपदा को गंभीर खतरा
पत्थर खदानों से अवैध खनन से जहां राजस्व की बड़ी चोरी हो रही है, वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित घोषित स्मारकों को भी खतरा उत्पन्न हो रहा है। बटेश्वरा व पढावली की गढ़ी से सटकर ही अवैध खनन होता है। बटेश्वरा के सामने बनाए गए कैफेटेरिया से सटकर खनन हो रहा है। यही वजह है कि यहां पर्यटक अपने निजी वाहनों से आने में भी कतराते हैं।
यूरोप और अरब तक जाता है मुरैना का पत्थर
मुरैना जिले से फर्शी पत्थर का कारोबार विदेशों तक फैला है। हर साल औसतन 250 करोड़ का कारोबार विदेशों से ग्वालियर-चंबल संभाग में होता है। बहुत से व्यापारी सीधे एक्सपोर्ट करते हैं जबकि कई राजस्थान एवं अन्य स्थानों पर बडे कारोबारियों के माध्यम से अपना माल विदेशों को भेजते हैं। इसमें और वृद्धि की कवायद की जा रही है। यूरोप और अरब देशों में इसकी मांग ज्यादा है।
मार्बल का विकल्प है यह पत्थर
सफेद पत्थर होने से इसका उपयोग फर्शी के रूप में होता है। मशीनों से घिसाई के बाद यह पत्थर चमकदार हो जाता है। मार्बल के विकल्प के तौर पर उपयोग में लाया जा सकता है। इसलिए इसकी मांग अधिक होती है। खास बात यह है कि मार्बल की जगह सस्ता होता है, इसलिए इसकी मांग ज्यादा है। सीसीएफ के निर्देश पर टीम ने पिछले दिनों नूराबाद एवं रिठौरा क्षेत्र में पत्थर खदानों की जांच की तो 93 जगह अवैध गड्ढे मिले इनकी संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। रोकने पा प्रयास किया जा रहा है।
एमपी शर्मा, रेंजर, सीसीएफ कार्यालय, ग्वालियर
जिला स्वीकृत खदानें अवैध कुल राजस्व चोरी अनुमानित