मुरैना

जिला अस्पताल की गंभीर लापरवाही, केंद्रीय मंत्री के भर्ती होने की संभावना में बुजुर्ग मरीज को ICU से निकालकर गैलरी में पटका

morena district hospital : 85 वर्षीय बुजुर्ग बीते 4 दिन से अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती है। लेकिन, शनिवार को केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के असपताल में भर्ती किये जाने की संभावना के चलते बुजुर्ग मरीज को वार्ड से निकालकर बाहर गैलरी में लिटा दिया।

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morena district hospital : मतदान के समय एक एक-वोट के लिए जनता के पैरों तक के दर्शन करके आने वाले कई जनप्रतिनिधि आमजन के वोट से ही चुनकर सांसद, विधायक और मंत्री बनते हैं। लेकिन, जब ये विशेष पद पर पहुंच जाते हैं तो देश के मतदाता को ही कीड़ा मकोड़ा समझ लेते हैं। इसका सार्थक उदाहरण शनिवार को मध्य प्रदेश के मुरैना जिला अस्पताल में देखने को मिला। यहां पिछले 4 दिन से सांस की गंभीर बीमारी के चलते आईसीयू वार्ड में भर्ती 85 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को सिर्फ इसलिए आईसीयू से निकालकर बाहर गैलरी में पटक दिया, क्योंकि अस्पताल प्रबंधन केंद्रीय मंत्री के भर्ती करना पड़ सकता था। अस्पताल प्रबंधन की इस हरकत से बुजुर्ग मरीज के परिजन खासा नाराज हो गए। फिलहाल, अब अस्पताल प्रबंधन अपने किये पर सफाई देता फिर रहा है।

दरअसल, ग्वालियर से दिल्ली सड़क मार्ग से जाते समय केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के लिए मुरैना जिला अस्पताल में प्रशासन ने आइसीयू में भर्ती मरीज को बाहर निकालकर गैलरी में लिटा दिया। शनिवार दोपहर एमएसएमई मंत्री मांझी की रास्ते में अचानक तबियत खराब मेहसूस होने लगी। इसपर, प्रशासन ने जिला अस्पताल में उनके भर्ती होने की संभावना पर प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए पहले से आइसीयू में भर्ती मरीज को बाहर गैलरी के पलंग में लिटा दिया। लेकिन, जब वो मुरैना से निकल गए और मरीज के परिजन ने नाराजगी जाहिर की तो अस्पताल द्वारा बुजुर्ग को वापस आइसीयू में भर्ती किया गया।

सांस की बीमारी से पीडि़त हैं बुजुर्ग

सांस की बीमारी के चलते 85 साल के साधू सिंह तोमर सिहोनियां के रहने वाले हैं। दो दिन पहले सांस लेने में हो रही खासा दिक्कत के चलते उन्हें आइसीयू में शिफ्ट किया गया था। बेड की जरूरत को देख उनकी जान से खिलवाड़ कर उन्हें आइसीयू से बाहर कर दिया गया।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

मामले को लेकर अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद ने बताया कि, अस्पताल के आइसीयू वार्ड में भर्ती मरीज साधू सिंह तोमर को बाहर गैलरी में रख दिया गया। वो आइसीयू में थे, लेकिन प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, उनकी स्थिति गंभीर नहीं थी। केंद्रीय मंत्री के बारे में संदेश आने पर दूसरे मरीज को आईसीयू से थोड़ी देर के लिए हटाया गया था। लेकिन अब बड़ा सवाल ये है कि अगर मरीज की हालत गंभीर नहीं थी तो फिर वो आईसीयू में भर्ती कैसे था?

सिविल सर्जन के आदेश पर खाली हुआ था बेड

मामले के तूल पकड़ने पर मीडिया द्वारा इस संबंध में नर्सिंग स्टॉफ से सवाल किया गया तो उनका कहना था कि सिविल सर्जन के आदेश पर बेड खाली कराया गया था। बता दें कि केंद्रीय मंत्री जितनराम मांझी ग्वालियर से धौलपुर की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान उनकी अचानक तबीयत खराब होने की जानकारी लगी, जिसके बाद जिला अस्पताल को पता चला कि उन्हें वहीं भर्ती किया जा सकता है। इसपर अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल ही अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती बुजुर्ग को निकालकर बाहर लिटा दिया और उस स्थान को केंद्रीय मंत्री के लिए रिजर्व कर दिया। बाद में मालूम हुआ कि मंत्री मांझी मुरैना से निकल चुके हैं, जिसके बाद प्रंबधन ने बुजुर्ग का पलंग दोबारा उसी स्थान पर शिफ्ट कर दिया।

केंद्रीय मंत्री जितनराम मांझी की बिगड़ी तबीयत

मिली जानकारी के मुताबिक बिहार के पूर्व सीएम एवं केंद्रीय मंत्री जितनराम मांझी ग्वालियर से धौलपुर जा रहे थे। सूचना है कि इसी दौरान रास्ते में अचानक उनकी तबीयत खराब होने की सूचना मिली। धौलपुर जाने के दौरन बीच में मुरैना पड़ता है, इसलिए जिला अस्पताल में उपचार के लिए आने की खबर मिली थी। अस्पताल से डॉक्टरों की टीम भी मौके पर गई थी, जिसने चेकअप कर दवा देने के बाद मंत्री जी को मध्यप्रदेश की सीमा से राजस्थान के धौलपुर की तरफ रवाना कर दिया गया।

Updated on:
23 Jun 2024 09:28 am
Published on:
23 Jun 2024 09:13 am
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