
Maharashtra News: वोटर लिस्ट की जांच के लिए चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अब शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पहले की तरह निष्पक्ष नहीं रह गया है और SIR के चलते बड़ी संख्या में लोगों के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ा है।
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में चुनाव आयोग पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत में आजादी के बाद हर वयस्क को वोट देने का अधिकार मिला था, लेकिन अब वोटर लिस्ट को लेकर ऐसी स्थिति बन रही है, जिसमें कुछ लोगों के नाम ही रह जाएंगे और कुछ के नाम हट सकते हैं। ठाकरे ने चुनाव आयोग को लेकर कहा कि जो संस्था कभी निष्पक्ष मानी जाती थी, उस पर अब भरोसे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उनका यह बयान द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें कहा गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने SIR और वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों पर पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों का जिक्र किया गया है।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद दूसरे विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठाए हैं। TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और पूरे मामले की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर वोटरों के नाम हटाने से किसी राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी कहा कि अगर रिपोर्ट में दी गई बातें सही हैं तो दो सवाल उठते हैं। पहला, चुनाव आयोग ने क्या फैसले लिए और दूसरा, ये फैसले किस तरीके से लिए गए। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने रिपोर्ट में सामने आई तस्वीर पर अपना पक्ष रखा है। सूत्रों के मुताबिक SIR समेत आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। यानी मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से ही फैसले हुए।
इस पूरे मामले में एक तरफ विपक्षी नेता SIR और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बता रहा है। ऐसे में अब विवाद सिर्फ वोटर लिस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनाव आयोग के अंदर फैसले लेने के तरीके को लेकर भी बहस तेज हो गई है।