
CJP Movement vs Anna Hazare Movement: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना 37 दिनों से चल रहा आंदोलन समाप्त कर दिया। इसके साथ ही देश भर में इस आंदोलन की तुलना 2011 के अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से की जाने लगी है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दोनों आंदोलनों में कुछ समानताएं जरूर हैं, लेकिन इनके मुद्दे, नेतृत्व और परिस्थितियां काफी अलग हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा, "…हिंसा से कभी हल नहीं निकलता… मैंने 22 बार अनशन किया और कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया। जिसके कारण 10 कानून बने। यह बहुत जरूरी है। हिंसा कभी भी सही नहीं है चाहें आप कोई भी हों।"
पूर्व आप नेता और राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव के मुताबिक, दोनों आंदोलनों की सबसे बड़ी समानता यह है कि दोनों सत्ता के खिलाफ जन असंतोष से पैदा हुए और इनमें आम जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बता दें कि योगेंद्र यादव अन्ना आंदोलन में शामिल थे।
हालांकि, उन्होंने कहा कि मौजूदा आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत युवाओं की बड़ी भागीदारी रही। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे छात्र इस आंदोलन से जुड़े, जिन्होंने पहले कभी राजनीति में सक्रिय रुचि नहीं दिखाई थी। इन छात्रों ने जन लोकपाल आंदोलन के प्रदर्शनकारियों की तुलना में अधिक व्यक्तिगत जोखिम उठाया और देश में बने राजनीतिक सन्नाटे को तोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
राजनीतिक विश्लेषक संजय कुमार का मानना है कि यह आंदोलन पिछले एक दशक में नरेंद्र मोदी सरकार के सामने आई सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियों में से एक बन गया।
उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन मुख्य रूप से दिल्ली की सीमाओं तक सीमित रहा था, जबकि कथित नीट पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं का मुद्दा देशभर के परिवारों से जुड़ा था। उनके अनुसार, जब किसी आंदोलन में युवाओं की बड़ी भागीदारी होती है तो सरकार के लिए उसे नियंत्रित करना या उनसे संवाद करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
पूर्व आप नेता आनंद कुमार ने कहा कि दोनों आंदोलनों में तीन प्रमुख समानताएं थीं। पहला, दोनों किसी राजनीतिक दल के आधिकारिक नेतृत्व में नहीं चले। दूसरा, दोनों की शुरुआत व्यवस्था से जनता की नाराजगी के कारण हुई। तीसरा, दोनों में युवाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों आंदोलनों के मूल मुद्दे अलग थे। अन्ना हजारे का आंदोलन भ्रष्टाचार और जन लोकपाल कानून की मांग पर केंद्रित था, जबकि CJP का आंदोलन कथित परीक्षा अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द रहा।
कुमार ने यह भी कहा कि दोनों आंदोलनों के दौरान सरकारों की प्रतिक्रिया अलग रही। उनके अनुसार, तत्कालीन UPA सरकार ने संवाद का रास्ता अपनाया था, जबकि मौजूदा सरकार ने शुरुआती दौर में सख्ती दिखाई, जिससे आंदोलन लंबा खिंच गया।
बहरहाल, शनिवार को केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने और प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद सीजेपी ने जंतर-मंतर पर अपना 37 दिन से चल रहा अपना धरना समाप्त कर दिया। हालांकि सीजेपी ने स्पष्ट कहा कि उसका अभियान यहीं खत्म नहीं होगा। संगठन अब शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करेगा। इसके लिए सीजेपी जल्द ही सरकार को परीक्षा सुधारों से जुड़ा 5-सूत्रीय चार्टर सौंपेगी। इस मुद्दे पर सरकार के साथ आगे भी बैठकें होंगी।