
एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे (Photo: IANS)
Vasant Davkhare Defamation Case : दिवंगत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता वसंत डावखरे की ओर से 2009 में दायर मानहानि मामले में कल्याण की अदालत ने 17 साल बाद फैसला सुनाया है। अदालत ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, पूर्व सांसद आनंद परांजपे और दिवंगत पूर्व नगरसेवक राजेंद्र देवलेकर को पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। यह मामला 2009 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित सीडी (वीडियो) दिखाए जाने से जुड़ा था।
2009 में कल्याण लोकसभा सीट पर अविभाजित एनसीपी की ओर से वसंत डावखरे और तत्कालीन अविभाजित शिवसेना की ओर से आनंद परांजपे चुनाव मैदान में थे। चुनाव प्रचार के दौरान एक सभा में डावखरे से संबंधित एक कथित वीडियो सीडी सार्वजनिक रूप से दिखाए जाने का आरोप लगा था। इसके बाद डावखरे ने इसे अपनी छवि खराब करने वाला बताते हुए मानहानि का मामला दर्ज कराया था।
उस समय उद्धव ठाकरे अविभाजित शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष थे। मामले में एकनाथ शिंदे, आनंद परांजपे और सभा के आयोजक राजेंद्र देवलेकर भी आरोपी बनाए गए थे। इस चुनाव में आनंद परांजपे विजयी हुए थे।
डावखरे का आरोप था कि उनके बारे में दिखाई गई वीडियो सीडी को कथित तौर पर एडिट या बदलकर उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर, उस समय शिवसेना की ओर से वीडियो को प्रामाणिक बताया गया था और डावखरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई थी।
करीब 17 साल तक चले इस मामले में 20 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इनमें राजनीतिक कार्यकर्ता, पदाधिकारी, सभा स्थल पर तैनात पुलिसकर्मी, आयोजक और जांच अधिकारी शामिल थे। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बयान भी अदालत में दर्ज किए गए थे। उद्धव ठाकरे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना बयान दर्ज कराया था और अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कथित सीडी, उसकी रिकॉर्डिंग, फॉरेंसिक रिपोर्ट और जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। बचाव पक्ष का तर्क था कि आरोपियों को कथित सीडी से जोड़ने वाला कोई ठोस और प्रत्यक्ष सबूत सामने नहीं आया।
अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों की समीक्षा के बाद पाया की दोष साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है और सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
वसंत डावखरे एनसीपी के कद्दावर नेता थे और महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति रह चुके थे। उन्हें एनसीपी प्रमुख शरद पवार का बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। जनवरी 2018 में मुंबई के बॉम्बे अस्पताल में उनका 68 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। वह किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। उनके निधन के बाद भी यह मामला अदालत में विचाराधीन था, जिस पर अब 17 साल बाद फैसला आया है।
Updated on:
23 Sept 2026 05:34 pm
Published on:
23 Sept 2026 05:22 pm
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