
Abhijeet Dipke father UPSC Dream: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा अपना 37 दिन का आंदोलन खत्म कर दिया। इस बीच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता भगवान शंकर दीपके का बयान चर्चा में है। उन्होंने साफ कहा कि उनका बेटा राजनीति में नहीं जाएगा और उनका सपना हमेशा से उसे सिविल सर्विसेज में देखने का रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि बेटे की पढ़ाई के लिए लिया गया एजुकेशन लोन वह आज भी चुका रहे हैं।
एक इंटरव्यू में भगवान शंकर दीपके ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा इतनी बड़ी पहचान बना लेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिजीत का भविष्य राजनीति में नहीं है।
उन्होंने कहा, "अभिजीत कभी राजनीति में नहीं जाएगा। हमारे परिवार में कोई राजनीति में नहीं रहा, यहां तक कि कोई सरपंच भी नहीं बना। मेरा सपना था कि वह UPSC पास करके सिविल सर्विस में जाए, ताकि उसका भविष्य सुरक्षित रहे।"
अभिजीत दीपके ने अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी करने के दौरान 15 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद 16 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सवाल पूछा, "अगर सारे कॉकरोच एक हो जाएं तो क्या होगा?" इसी विचार से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की शुरुआत हुई।
कुछ ही दिनों में सीजेपी को सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर लाखों लोगों का समर्थन मिलने लगा। बाद में यह ऑनलाइन अभियान जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन में बदल गया।
भगवान शंकर दीपके ने बताया कि वह खुद सिविल इंजीनियर हैं और चाहते थे कि उनका बेटा भी इंजीनियर बने। अभिजीत ने छत्रपति संभाजीनगर के सरस्वती भुवन कॉलेज से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद पुणे के सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट में इंजीनियरिंग में दाखिला लिया।
हालांकि, उनका मन इंजीनियरिंग में नहीं लगा। बाद में उन्होंने तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ, पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की और 2021 में स्नातक किया। इसी दौरान उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में कम्युनिकेशन एडवाइजर के रूप में भी काम किया।
अभिजीत के पिता ने बताया कि पत्रकारिता के बाद बेटे ने पीआर (Public Relations) में उच्च शिक्षा हासिल करने की इच्छा जताई। उस समय वह रिटायरमेंट के करीब थे, लेकिन बेटे की पढ़ाई के लिए उन्होंने एजुकेशन लोन लिया। उन्होंने कहा, "मैंने एजुकेशन लोन लेकर उसे बोस्टन यूनिवर्सिटी भेजा। आज भी मैं उसी लोन की किस्तें चुका रहा हूं।" उन्होंने बताया कि बचपन में अभिजीत को क्रिकेट का काफी शौक था, लेकिन उन्होंने उसे पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए कहा।