मुंबई

‘नेताओं के बच्चे 1 दिन पैदल चलकर गांव के स्कूल जाएं’, अभिजीत दीपके की मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को खुली चुनौती

Abhijeet Dipke Hingoli : हिंगोली में सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने नेताओं को अपने बच्चों को 1 दिन गांव के स्कूल भेजने और पैदल चलाकर समस्या समझने की चुनौती दी। उन्होंने ग्रामीण व आदिवासी स्कूलों में बस सुविधा और शिक्षा सुधार की मांग उठाई।
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Aug 18, 2026
Abhijeet Dipke Hingoli
अभिजीत दीपके की मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को खुली चुनौती, फोटो IANS

School Thik Karo Campaign: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों की बदहाली को लेकर महाराष्ट्र सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हिंगोली में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दीपके ने मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को कम से कम एक दिन के लिए गांव के सरकारी स्कूलों में भेजें और उन्हें ग्रामीण छात्रों की तरह पैदल चलाकर स्कूल पहुंचाएं, ताकि उन्हें धरातल की समस्याओं का अहसास हो सके।

बता दें कि पत्रकारों से बातचीत करते हुए अभिजीत दीपके ने राज्य सरकार पर ग्रामीण परिवहन व्यवस्था ध्वस्त होने का आरोप लगाया। दीपके ने कहा कि दूरदराज के इलाकों में बच्चों को रोजाना 7 से 10 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता है। मानसून के दौरान कीचड़ और जलभराव के कारण यह सफर और भी खतरनाक हो जाता है। उन्होंने कहा कि चुनाव रैलियों और सभाओं के लिए राजनेता रातों-रात सैकड़ों बसें और ट्रेनें बुक कर लेते हैं, लेकिन गरीब बच्चों को स्कूल भेजने के लिए सरकार एक बस तक मुहैया नहीं करा पाती। 15 साल बाद भी स्थिति न बदलना बेहद शर्मनाक है।

'स्कूल ठीक करो' अभियान और व्यक्तिगत अनुभव

अभिजीत दीपके ने अपने पैतृक गांव हिंगोली से 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की दशा सुधारना है। उन्होंने बताया कि यह लड़ाई उनके व्यक्तिगत अनुभवों से जुड़ी है। उन्होंने बचपन में अपनी बहनों और भाइयों को कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते देखा है और आज भी गांव की बेटियों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।

आदिवासी छात्रों की मौत पर दुख

मेलघाट (अमरावती) और गढ़चिरौली के आदिवासी आवासीय आश्रम शालाओं में हाल ही में हुई छात्रों की मौतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक मंत्री के बच्चे की जान की जो कीमत है, वही कीमत एक गरीब या आदिवासी बच्चे की जान की भी होनी चाहिए। किसी की जिंदगी कम कीमती नहीं है।

'सरपंच और ग्रामीण दुश्मन नहीं, हमारे सहयोगी हैं'

दीपके ने स्पष्ट किया कि उनका यह अभियान स्थानीय सरपंचों या ग्रामीणों के खिलाफ नहीं है। हमारी लड़ाई गांव के सरपंचों या लोगों से नहीं है। उनके बच्चे भी इन्हीं स्कूलों में पढ़ते हैं और परेशानियों का सामना करते हैं। हम ग्रामीणों को साथ लेकर व्यवस्था बदलेंगे। अगर सरकार काम नहीं कर सकती, तो हम ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल ठीक करेंगे।

राजनीति में जाति-धर्म के खेल पर साधा निशाना

पिछले एक दशक के राजनीतिक माहौल पर चिंता जताते हुए सीजेपी प्रमुख ने कहा कि नेताओं ने राजनीति का ध्यान शिक्षा और रोजगार से हटाकर जाति और धर्म के बंटवारे पर केंद्रित कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनेताओं के बच्चे विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि गरीब, मजदूर और आदिवासी परिवारों के बच्चे बुनियादी शिक्षा के लिए भी तरस रहे हैं।

Updated on:
18 Aug 2026 05:28 pm
Published on:
18 Aug 2026 05:25 pm
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