Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की चार्टर्ड विमान हादसे में मौत हो गई। हादसे से कुछ मिनट पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर आखिरी पोस्ट शेयर की थी। इस घटना से पूरे राज्य में शोक का माहौल है।
Ajit Pawar Plane Crash: बुधवार सुबह महाराष्ट्र से एक बहुत ही चौंकाने वाली खबर आई है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान हादसे में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह जिस चार्टर्ड प्लेन से बारामती जा रहे थे, वह पुणे जिले के बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के समय हादसे का शिकार हो गया। वह चुनाव से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने जा रहे थे। अचानक हुए इस हादसे से पूरे महाराष्ट्र में मातम छाया हुआ है और सभी लोग गहरे सदमे में हैं। इस हादसे में अजित समेत पांच लोगों की जान चली गई है।
बताया जा रहा है कि बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के समय अजित पवार का चार्टर्ड विमान हादसे का शिकार हो गया। रनवे पर उतरते समय विमान में आग लग गई और वह जलने लगा। इस हादसे में विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना उस समय हुई, जब वह पुणे में 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद के चुनावों से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने जा रहे थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हादसे में अजित पवार को गंभीर चोटें आईं थीं, जिस वजह से वह बच नहीं सके। इस दुर्घटना से कुछ मिनटों पहले ही उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया था, जिसमें उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी थी।
अजित पवार ने आखिरी पोस्ट 28 जनवरी को 8 बजकर 57 मिनट पर सोशल मीडिया X के अकाउंट पर की थी। पोस्ट में उन्होंने लिखा, "महान स्वतंत्रता सेनानी और स्वराज के लिए संघर्ष करने वाले ‘पंजाब केसरी’ लाला लाजपत राय जी को उनकी जयंती पर सादर श्रद्धांजलि। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। उनका देशप्रेम और बलिदान हमेशा हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।"
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को हुआ था और वह महाराष्ट्र की राजनीति के बड़े और वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे। वह शरद पवार के भतीजे थे। अजित पवार छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के पद पर रह चुके थे। 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में विभाजन के बाद अजित पवार अपनी पार्टी के नेता बनकर उभरे। उनकी महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने वित्त, जल संसाधन और योजना जैसे बड़े विभागों की जिम्मेदारी निभाई और राज्य की कई नीतियों व बजट तैयार करने में भूमिका निभाई। उन्हें महाराष्ट्र का “अंतिम राजनीतिक सर्वाइवर” कहा जाता था।