
Hindi Diwas 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को हिंदी दिवस के मौके पर देश के भाषा प्रेमियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष हिंदी दिवस की शुरुआत गणेश उत्सव के साथ हो रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘विघ्नहर्ता’ भगवान गणेश भारतीय भाषाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे और उनकी राह में आने वाली बाधाओं को दूर करेंगे।
अमित शाह ने नवी मुंबई के CIDCO प्रदर्शनी केंद्र में हिंदी दिवस समारोह और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र की बहुभाषी संस्कृति का भी उल्लेख किया और कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा सीखना अनिवार्य किया गया है।
एक जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने महाराष्ट्र में गणेश उत्सव की शुरुआत का श्रेय लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को दिया। उन्होंने कहा कि तिलक यह समझते थे कि देश की रचना, संस्कृति और इतिहास के प्रति समाज में जागरूकता सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के माध्यम से ही पैदा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ लोकमान्य तिलक ने गणेश उत्सव और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाने की परंपरा को आगे बढ़ाया। अमित शाह ने कहा कि हिंदी दिवस और गणेश उत्सव का एक साथ होना एक शुभ संयोग है। उन्होंने भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ बताते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि भगवान गणेश भारतीय भाषाओं के विकास के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करेंगे।
गृह मंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत नहीं है, बल्कि गुलामी के दौर में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा भारतीय चेतना को जगाने का प्रयास था। अमित शाह ने संसद के मानसून सत्र में पारित Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 का जिक्र करते हुए कहा कि इसके जरिए 1971 के कानून में संशोधन कर राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मानित ‘वंदे मातरम्’ को संबंधित कानून की धारा 3 के दायरे में लाया गया है। उन्होंने संसद सत्र के समापन पर ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गायन के फैसले का भी उल्लेख किया। अमित शाह ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने स्वतंत्रता की भावना और आजादी हासिल करने की इच्छा को जगाने के साथ भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव रखने का काम किया।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र की बहुभाषी संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि यहां मराठी के साथ कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी और कन्नड़ समेत कई भाषाओं को सम्मान मिला है।
उन्होंने महाराष्ट्र को देश का सबसे बड़ा बहुभाषी राज्य बताया। अमित शाह ने अपने गुजरात से होने का जिक्र करते हुए कहा कि वहां गुजराती बोली जाती है, लेकिन जब उनकी पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर काम करने की जिम्मेदारी दी तो उन्हें देशभर में काम करने में कोई कठिनाई नहीं हुई, क्योंकि वह हिंदी समझते और बोलते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राजभाषा और भारतीय भाषाओं को महत्व देने की यह यात्रा आगे भी जारी रहेगी।