
Baba Siddique: गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई का नाम सलमान खान पर हमले और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में सामने आया है, लेकिन मुंबई पुलिस अब तक उससे पूछताछ नहीं कर पाई है। अब पुलिस ने केंद्र सरकार से तिहाड़ जेल से बाहर ले जाने पर लगी रोक में ढील देने की मांग की है। गृह मंत्रालय के आदेश के कारण अनमोल की हिरासत हासिल करने में कानूनी अड़चन आ रही है। इस मामले में अदालत भी पुलिस से पूछताछ के लिए किए गए प्रयासों का ब्योरा मांग चुकी है।
मुंबई में हुए कई चर्चित अपराधों में अनमोल बिश्नोई का नाम सामने आया है। इनमें अप्रैल 2024 में अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित घर के बाहर हुई गोलीबारी और अक्टूबर 2024 में एनसीपी नेता व पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या शामिल है। इन मामलों की जांच कर रही मुंबई पुलिस अब अनमोल से पूछताछ करना चाहती है। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मुंबई पुलिस ने पिछले सप्ताह महाराष्ट्र सरकार को पत्र भेजकर केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की। पुलिस चाहती है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय 5 दिसंबर 2025 को जारी उस आदेश में अस्थायी राहत दे, जिसके तहत अनमोल को दिल्ली की तिहाड़ जेल से बाहर ले जाने पर रोक है।
यह मांग ऐसे वक्त आई है, जब बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में गिरफ्तार अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई शुरू होने की तैयारी है। पुलिस ने अनमोल को इस मामले में आरोपी और कथित मास्टरमाइंड बताया है।
मुंबई पुलिस का दावा है कि बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में अब तक गिरफ्तार किए गए 27 आरोपियों ने अनमोल बिश्नोई के निर्देशों पर काम किया था। इसके बावजूद पुलिस ने विशेष अदालत को बताया कि वह अनमोल से पूछताछ नहीं कर पाई है। इस मामले में अदालत भी लगातार पुलिस से सवाल कर रही है। विशेष अदालत ने पुलिस से यह जानना चाहा कि जब मुख्य आरोपी पहले से जेल में बंद है, तो उसकी पेशी और पूछताछ के लिए जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए गए।
अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से निर्वासित किए जाने के बाद 19 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार किया था। इसके कुछ सप्ताह बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 303 के तहत उसकी जेल से बाहर आवाजाही पर रोक लगाने का आदेश जारी हुआ। इस प्रावधान के तहत सरकार किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को उस जेल से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध लगा सकती है, जहां वे बंद हैं। इसके पीछे अपराध की गंभीरता, किसी दूसरी जगह ले जाने पर सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका और जनहित जैसे कारण हो सकते हैं। आदेश लागू रहने तक अदालत भी आरोपी को जेल से बाहर पेश करने का निर्देश नहीं दे सकती। जांच एजेंसी अदालत की अनुमति से जेल परिसर में ही उससे पूछताछ कर सकती है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था में पूछताछ सीमित हो जाती है। एक या दो अधिकारियों को कुछ घंटों के लिए ही सवाल करने की अनुमति मिल सकती है और अन्य आरोपियों को आमने-सामने लाना संभव नहीं होता। दिल्ली की एक अदालत भी इसी आदेश का हवाला देते हुए अनमोल के लिए पेशी वारंट जारी करने से इनकार कर चुकी है।
अनमोल का बड़ा भाई और गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर भी इसी तरह का प्रतिबंध लागू है। लॉरेंस गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। उसके खिलाफ यह आदेश अगस्त 2023 में पहली बार जारी हुआ था, जिसे हर साल आगे बढ़ाया जाता रहा है।
बाबा सिद्दीकी की पत्नी शहजीन ने जुलाई में अपने वकीलों प्रदीप घरत और त्रिवेणकुमार करनानी के जरिए विशेष अदालत में याचिका दायर की थी। इसमें मांग की गई थी कि पुलिस को अनमोल की हिरासत हासिल करने और हत्या के पीछे की वजह जानने के लिए उससे पूछताछ करने का निर्देश दिया जाए। विशेष न्यायाधीश एस.आर. नवंदर ने पुलिस से पूछा कि हिरासत में मौजूद वांछित आरोपी की पेशी सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अगस्त में अदालत ने जांच अधिकारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया।
पुलिस ने जवाब में कहा कि केंद्र सरकार के आदेश के कारण अनमोल की भौतिक हिरासत हासिल करने में कानूनी बाधा आ रही है। इस वजह से प्रभावी जांच करना मुश्किल हो गया है और उससे पूछताछ नहीं की जा सकी। 21 अक्टूबर को अदालत ने पुलिस को मुख्य आरोपी की पेशी सुनिश्चित करने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी देने को कहा। बुधवार को पुलिस ने अदालत में गोपनीय रिपोर्ट पेश की। इसके बाद मामले की सुनवाई अगले सप्ताह तक के लिए टाल दी गई।
12 अक्टूबर 2024 को बांद्रा पूर्व में पूर्व विधायक जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर बाबा सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस का आरोप है कि इस वारदात को बिश्नोई गैंग के सदस्यों ने अंजाम दिया। सलमान खान पर हमले के मामले में अनमोल ने खुद भी आत्मसमर्पण कर न्यायिक कार्यवाही में शामिल होने की मांग की है। उसकी याचिका पर अभी फैसला नहीं हुआ है। टाइगर श्रॉफ से जुड़े गोलीबारी मामले में अनिल पंडित मुख्य आरोपी है। घटना के बाद शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज्य सरकार पर ऐसे हमलों को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया था। उन्होंने सरकार को लॉरेंस बिश्नोई को महाराष्ट्र लाकर दिखाने की चुनौती भी दी थी।