मुंबई

छात्रों के समर्थन में मौन धरने पर बैठे अन्ना हजारे, भावुक होकर रो पड़े, तबीयत बिगड़ने पर छोड़ना पड़ा मंच

Anna Hazare Silent Protest: अस्वस्थ होने के बावजूद अन्ना हजारे आज अहिल्यानगर में छात्रों के समर्थन में मौन आंदोलन में शामिल हुए। लेकिन सेहत बिगड़ने पर उन्हें जल्द लौटना पड़ा। इस दौरान वह भावुक भी हो गए।
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Jul 23, 2026
Anna Hazare news
अन्ना हजारे (Photo: IANS/IANS)

Anna Hazare Silent Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन को अब देशभर से समर्थन मिल रहा है। इसी कड़ी में वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे भी छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में मौन आंदोलन में हिस्सा लेकर छात्रों के संघर्ष के प्रति एकजुटता जताई। लेकिन तबियत ठीक नहीं होने के कारण उन्हें जल्द लौटना पड़ा।

अन्ना हजारे ने गुरुवार को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के शिर्डी स्थित वाडिया पार्क के गांधी स्मारक में आयोजित मौन धरने में हिस्सा लिया। हालांकि, अन्ना हजारे को कुछ समय बाद ही तबीयत बिगड़ने के कारण धरना स्थल छोड़ना पड़ा। इस दौरान अन्ना हजारे भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। धरना स्थल से सामने आये वीडियो में वह रोते हुए दिख रहे है।

अन्ना के जाने के बाद भी जारी रहा मौन आंदोलन

खराब स्वास्थ्य के बावजूद अन्ना हजारे छात्रों के संघर्ष के प्रति अपना नैतिक समर्थन जताने के लिए धरने में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने छात्रों के मुद्दों पर एकजुटता दिखाई और उनकी मांगों का समर्थन किया। उन्होंने छात्रों के संघर्ष के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और कहा कि युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते वह ज्यादा देर तक धरने में नहीं रुक सके और कुछ समय बाद वहां से रवाना हो गए।

अन्ना हजारे के लौटने के बावजूद वाडिया पार्क स्थित गांधी स्मारक पर छात्रों के समर्थन में मौन आंदोलन जारी रहा।

पीएम मोदी को लिखा पत्र- मंत्री के इस्तीफे से सरकार कमजोर नहीं होगी

इससे पहले अन्ना हजारे ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था। उन्होंने अपने पत्र में कहा था कि लोकतंत्र में संवाद हमेशा टकराव से बेहतर होता है और युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए मंत्री का इस्तीफा लिया जाना चाहिए। ऐसा करने पर सरकार कमजोर नहीं होगी।

दरअसल, संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली में हजारों छात्र संसद की ओर मार्च कर रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया, जिसमें 80 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया गया। इस घटना के बाद आंदोलन ने और जोर पकड़ लिया। CJP और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल NEET (मेडिकल प्रवेश) परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

खबर अपडेट की जा रही है।

Updated on:
23 Jul 2026 04:05 pm
Published on:
23 Jul 2026 03:38 pm