महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के गठबंधन पर शिवसेना (शिंदे गुट) ने सवाल उठाये है। सांसद श्रीकांत शिंदे ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इसके बारे में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से सवाल पूछा जाना चाहिए।
महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बीच ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद के नतीजे आने के बाद बने समीकरणों ने सबको चौंका दिया है। जहां सत्ता के लिए धुर विरोधी भाजपा और कांग्रेस एक साथ आ गई है। इस पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस गठबंधन पर सीधा जवाब देने के बजाय गेंद भाजपा नेतृत्व के पाले में डाल दी है। श्रीकांत ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से ही सवाल किया जाना चाहिए कि उन्होंने कांग्रेस से गठबंधन क्यों किया।
श्रीकांत शिंदे ने कहा कि शिवसेना और भाजपा लंबे समय से केंद्र और राज्य में गठबंधन में हैं और स्थानीय स्तर पर भी इस गठबंधन (महायुति) को मजबूत करना हमेशा से उनका लक्ष्य रहा है। अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा-कांग्रेस की साझेदारी पर उन्होंने कहा कि इस विषय में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से ही सवाल किया जाना चाहिए। शिवसेना ने हमेशा विकास को केंद्र में रखकर राजनीति की है और आगे भी यही प्राथमिकता रहेगी।
श्रीकांत ने यह बात अंबरनाथ में भाजपा नेताओं द्वारा हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों के बाद कांग्रेस के साथ गठबंधन की घोषणा के बाद कही है।
बता दें कि महाराष्ट्र में कुछ नगर निकायों में चुनाव के बाद भाजपा ने अपने विरोधी दलों कांग्रेस और एआईएमआईएम (AIMIM) के साथ गठबंधन कर लिया है। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऐसे गठबंधनों को खारिज करते हुए कहा है कि इसमें शामिल भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
महाराष्ट्र में पिछले महीने हुए नगर निकाय चुनाव के बाद भाजपा ने अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी के साथ गठबंधन किया था। इस गठबंधन को ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ नाम दिया गया। इस गठबंधन का मुकाबला महायुति में भाजपा की सहयोगी शिवसेना (शिंदे गुट) से था।
इसी तरह, अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भाजपा ने असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और कुछ अन्य दलों के साथ हाथ मिला लिया। भाजपा के इन गठबंधनों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।
जिसके बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने साफ कहा कि ऐसे गठबंधनों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी नहीं है और यह अनुशासन के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस या AIMIM से कोई भी गठबंधन स्वीकार्य नहीं है। जिन भाजपा नेताओं ने ऐसा किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि राज्य में भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के गठबंधन महायुति की सरकार है।
अंबरनाथ में शिवसेना 27 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत थी। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने के लिए भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी (अजित पवार) के साथ मिलकर 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' गठबंधन बनाया और बहुमत हासिल कर लिया। इसके बाद भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटिल नगर परिषद की अध्यक्ष चुनी गईं। हालांकि शिंदे की शिवसेना ने इस गठबंधन को अनैतिक व मौकापरस्ती बताया।
अंबरनाथ शहर एकनाथ शिंदे का मजबूत गढ़ माने जाने वाले ठाणे जिले में है। जो कि शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के कल्याण लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। अंबरनाथ पहले से ही भाजपा और शिवसेना के बीच राजनीतिक वर्चस्व की कड़ी लड़ाई का गवाह रहा है, जिससे यहां की सियासत हमेशा चर्चा में रहती है।
उधर, अकोला जिले के अकोट में भाजपा ने एआईएमआईएम समेत कई दलों के साथ ‘अकोट विकास मंच’ बनाया। भाजपा को 11 और ओवैसी की पार्टी AIMIM को 5 सीट पर जीत मिली। अन्य दलों के समर्थन से गठबंधन को बहुमत मिल गया और भाजपा की माया धुले मेयर चुनी गईं। जबकि कांग्रेस और प्रकाश अंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाडी विपक्ष की भूमिका में है।