
रोहित के. तिवारी
मुंबई. कोविड-19 महामारी के प्रकोप से लड़ने के लिए जहां केंद्र समेत राज्य सरकार ने विभिन्न तरह के उपायों में जुटी हैं। वहीं आईटी बॉम्बे की ओर से भी कोरोना वायरस पर निजात पाने के लिए तरह-तरह के प्रयोग किए जा रहे हैं। आईआईटी-बी की ओर से यूवी सैनेटाइजेशन केबिन का निर्माण किया गया है। इस केबिन के सहयोग से बाहर से आने वाली हर छोटी बड़ी वस्तु को घर में ही बगैर किसी असुविधा के ही आराम से सैनेटाइज किया जा सकेगा और इससे 100 प्रतिशत तक कोई भी पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। वहीं कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने का डर बिल्कुल भी नहीं रहेगा। वहीं छात्रों ने "पत्रिका" से खास बातचीत में बताया कि भविष्य में इस केबिन को घर-घर तक पहुंचाने की उनकी योजना है, जबकि इसमें नाममात्र एक हजार रुपए को खर्चा आएगा।
दो कंपनियों ने मिलकर तैयार किया केबिन...
प्राथमिक तौर पर इस आईआईटी-बी के एजुमिनी और जीटी तरंग एनर्जी सेल्यूशन के को-फाउंडर रत्नेश मिश्रा व मांडवी धवन और मनस्तू स्पेस टेक्नोलॉजीस के को-फाउंडर तुषार जाधव अशतेश कुमार के सहयोग से एक बाल्टीनुमा सैनेटाइजेशन केबिन तैयार किया गया है। आईटी बॉम्बे से पास आउट रत्नेश और मांडवी दोनों नासिक निवासी हैं और सभी ने मिलकर कोरोना वायरस की इस संकट की घड़ी में घर में ही उपलब्ध सामानों से करीब 800 की लागत से एक वीटी सैनिटाइजेशन केबल को तैयार किया है। इसमें अल्ट्रावायलेट किरणों का प्रयोग किया गया है, जिसके किसी भी वस्तु पर पडने से उसमें मौजूद हर तरह से वायरस खत्म हो जाते हैं। हालांकि इसके क्लीनिकल सर्टिफिकेशन के लिए आईएमसीआर से आईआईटी-बी के प्रोफेसरों की ओर से बातचीत चल रही है।
प्रोफेसर्स का मिला मार्ग दर्शन...
हमने इस प्रयोग में अल्ट्रा वायलेट किरणों का प्रयोग किया है, जो सीधे तौर पर शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। लेकिन एक खास विधि से बनाए गए इस केबिन से बाहर वे किरणें नहीं आ सकतीं, जबकि केबिन में रखी की वस्तु में पहले से उपलब्ध वायरस के लक्षणों को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। वहीं इस केबिन को आईआईटी-बी के प्रोफेसर पी. कुमारेसन और प्रो. ए. चौधरी के मार्ग-दर्शन में तैयार किया गया है, जो बहुत ही किफायती और अफोर्डेबल रहेगा, जो हर किसी तक पहुंच सकेगा।
- मानवी धवन, को-फाउंडर, जीटी तरंग एनर्जी सेल्यूशन
एनआईवी से हो रही बात...
कोविद-19 से निपटने के लिए हमारे स्टूडेंट्स की ओर से बहुत ही नायाब तरीका अपनाया गया है। उनके इस प्रयोग में हमारी ओर से पूरा मार्गदर्शन किया गया है, जबकि इस केबिन में सैनेटाइज की गई वस्तुओं की वायरस के लक्षण पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। वहीं इसे जल्द ही मार्केट में लाने की प्लानिंग चल रही है और इसके क्लीनिकली सर्टीफिकेशन के लिए आईआईटी-बी की ओर से एफडीए समेत आईएमसीआर के अलावा एनआईवी (नासिक) से विचार-विमर्श हो रहा है।
- प्रो. पी. कुमारेसन, आईडीसी, आईआईटी-बी
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