
मुंबई. पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से सोमवार को विशेष पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट फाइल की गई। कुल 7000 पन्नों की चार्जशीट में पीएमसी बैंक घोटाले के लिए रियल इस्टेट कंपनी एचडीआईएल के प्रमोटर राकेश और सारंग वधावन (पिता-पुत्र) को मुख्य आरोपी बनाया गया है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) इस मामले में एचडीआईएल के प्रमोटरों सहित 12 लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें बैंक के पूर्व अध्यक्ष वरयाम सिंह और प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस सहित अन्य डायरेक्टर और अधिकारी शामिल हैं।
ईडी ने दावा किया है कि पीएमसी बैंक ने नियमों को ताक पर रखते हुए एचडीआईएल को 6,700 करोड़ रुपए का कर्ज दिया। इतना ही नहीं जब एचडीआईएल यह पैसा लौटाने में विफल रही तो बैंक प्रबंधन ने उस पर पर्दा डालने के लिए गलत तरीका अपनाया। यह जानकारी मौद्रिक नियामक भारतीय रिजर्व बैंक से भी छिपाई गई। गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद रिजर्व बैंक ने निदेशक मंडल को बर्खास्त कर पीएमसी बैंक के लिए प्रशासक नियुक्त कर दिया। सितंबर से ही पीएमसी बैंक के सामान्य परिचालन पर रोक लगा दी गई। खाताधारकों को छह महीने के दौरान केवल 50 हजार रुपए निकालने की छूट केंद्रीय बैंक ने दी है।
ईडी ने बताया है कि एचडीआईएल ने पीएमसी बैंक से 6,700 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। बैंक के पास 11,610 करोड़ रुपए की जमा राशियां हैं। महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों को मिला कर पीएमसी बैंक के खाताधारकों की संख्या तकरीबन 16 लाख है। हैरानी वाली बात यह कि पीएमसी बैंक की ओर से दिए गए कुल 9 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में एचडीआईएल की हिस्सेदारी 73 प्रतिशत है।
10.50 करोड़ कैश गायब
मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) और ईडी मामले की जांच कर रही हैं। बैंक की आंतरिक जांच टीम ने इस बीच खुलासा किया कि पीएमसी बैंक के रिकॉर्ड से कुल 10.5 करोड़ रुपए कैश गायब है। जांच में पता चला है कि एचडीआईएल समूह की कंपनियों ने 10 करोड़ रुपए के चेक बैंक के एमडी के पास भेजे, जिन्हें बिना जमा किए ही कैश दे दिया गया। बाकी 50 से 55 लाख रुपए का काई हिसाब नहीं है।
पूरा पैसा निकालना चाहते हैं जमाकर्ता
घोटाले कां भांडा फूटने के बाद पीएमसी बैंक के जमाकर्ता अपनी गाढ़ी कमाई डूबने की आशंका में परेशान हैं। कई खातधारकों की मौत भी हो चुकी है। जमाकर्ता बैंक में जमा अपना पूरा पैसा निकालना चाहते हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री, रिजर्व बैंक गवर्नर के साथ ही मुख्यमंत्री तक से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन, जमाकर्ताओं को अब तक आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला है।