Maharashtra Politics: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सख्त चेतावनी के बाद भाजपा ने अंबरनाथ में स्थानीय नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बात कही थी। लेकिन कुछ ही देर बाद अंबरनाथ की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया।
महाराष्ट्र की राजनीति में दलबदल और समीकरण बदलने का दौर जारी है। अंबरनाथ में बुधवार को एक ही दिन में बड़ी सियासी उठापटक देखने को मिली। सुबह जिस कांग्रेस पार्टी ने अपने 12 नगरसेवकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निलंबित किया था, उन्हीं नगरसेवकों ने रात होते-होते भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया।
भाजपा (BJP) के प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने इन सभी नगरसेवकों का पार्टी में स्वागत किया। इस मौके पर चव्हाण ने कहा, "ये नगरसेवक सत्ता के लालच में नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास के लिए हमारे साथ आए हैं। राज्य सरकार जिस गति से काम कर रही है, उसे देखते हुए इन जनप्रतिनिधियों को विश्वास है कि वे बीजेपी में रहकर ही अपनी जनता को न्याय दिला पाएंगे।"
अंबरनाथ नगर पालिका में राजनीतिक बिसात बेहद दिलचस्प हो गई है। दरअसल, शिवसेना (शिंदे गुट) को सत्ता से दूर रखने के लिए बीजेपी ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के साथ हाथ मिलाकर 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' बनाई थी। मगर कुछ ही घंटे बाद ही यह गठबंधन टूट गया। इसके बाद अंबरनाथ की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) ने अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप पाटिल और हाल ही में चुनकर आए सभी 12 नगरसेवकों (पार्षदों) को पार्टी से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के आदेश पर की गई है। प्रदेश कांग्रेस की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में कहा गया कि अंबरनाथ इकाई ने प्रदेश कार्यालय को बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के भाजपा के साथ गठबंधन किया, जिसकी जानकारी पार्टी नेतृत्व को मीडिया के माध्यम से मिली। यह कृत्य कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला और पार्टी अनुशासन का खुला उल्लंघन है। इसलिए प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को कांग्रेस से निलंबित किया जा रहा है। साथ ही अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस की पूरी कार्यकारिणी को भी बर्खास्त कर दिया गया है। कांग्रेस के चिह्न पर चुनाव जीतकर आए सभी 12 पार्षदों को भी अनुशासन भंग करने के लिए निलंबित कर दिया गया है।
उधर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस गठबंधन को खारिज करते हुए सख्त चेतावनी दी थी। फडणवीस ने कड़ी नाराजगी जताते हुए स्थानीय भाजपा इकाई से अंबरनाथ में कांग्रेस के साथ गठबंधन खत्म करने को कहा है। साथ ही स्थानीय नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही थी।
अंबरनाथ में शिवसेना 27 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत थी। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने के लिए भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी (अजित पवार) के साथ मिलकर 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' गठबंधन बनाया और बहुमत हासिल कर लिया। इस बेमेल गठबंधन को एक निर्दलीय ने भी समर्थन दिया।
भाजपा के स्थानीय कार्यालय में 31 दिसंबर को बैठक हुई, जिसके बाद गठबंधन बनाने की जानकारी ठाणे के जिला अधिकारी को देते हुए एक पत्र सौंपा गया। इसके बाद भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटिल अंबरनाथ नगर पालिका की अध्यक्ष चुनी गईं। हालांकि शिंदे की शिवसेना ने इस गठबंधन को अनैतिक व मौकापरस्ती बताया और भाजपा नेतृत्व से कार्रवाई की मांग की।
अंबरनाथ नगर निकाय सदन में कुल 60 सदस्य हैं। 20 दिसंबर को हुए चुनावों में एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 27 सीटें जीतीं, जो बहुमत से मात्र चार कम थीं। भाजपा को 14, कांग्रेस को 12, एनसीपी को चार सीट मिलीं, जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार भी जीते थे।
अंबरनाथ शहर एकनाथ शिंदे का मजबूत गढ़ माने जाने वाले ठाणे जिले में है। जो कि शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के कल्याण लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। अंबरनाथ में भाजपा और शिवसेना के बीच राजनीतिक दबदबे के लिए पहले भी इस तरह के टकराव हो चुके हैं।