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भाजपा से हाथ मिलाने वाली पूरी कांग्रेस इकाई भंग, 12 पार्षद सस्पेंड; फडणवीस भी एक्शन मोड में

कांग्रेस ने अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप पाटिल और हाल ही में चुनकर आए सभी 12 पार्षदों को पार्टी से निलंबित कर दिया है। सीएम फडणवीस ने भी कांग्रेस से हाथ मिलाने वाले स्थानीय भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jan 07, 2026

Devendra Fadnavis and Harshwardhan Sapkal

सीएम फडणवीस और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल (Photo: IANS)

BJP Congress Alliance in Ambernath: महाराष्ट्र के ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने के मकसद से स्थानीय भाजपा और कांग्रेस नेताओं का हाथ मिलाना अब भारी पड़ता दिख रहा है। इस बेमेल गठबंधन पर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाया है। कांग्रेस ने अंबरनाथ के ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल समेत सभी 12 नवनिर्वाचित पार्षदों को निलंबित कर दिया है, जबकि भाजपा भी कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस या असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) के साथ कोई भी गठबंधन स्वीकार्य नहीं है और इसे तुरंत तोड़ने के लिए कहा गया है। भाजपा के संबंधित नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बीच, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) ने अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप पाटिल और हाल ही में चुनकर आए सभी 12 नगरसेवकों (पार्षदों) को पार्टी से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के आदेश पर की गई है।

प्रदेश कांग्रेस की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अंबरनाथ इकाई ने प्रदेश कार्यालय को बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के भाजपा के साथ गठबंधन किया, जिसकी जानकारी पार्टी नेतृत्व को मीडिया के माध्यम से मिली। यह कृत्य कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला और पार्टी अनुशासन का खुला उल्लंघन है। इसलिए प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को कांग्रेस से निलंबित किया जा रहा है। साथ ही अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस की पूरी कार्यकारिणी को भी बर्खास्त करने का फैसला लिया गया है। कांग्रेस के चिह्न पर चुनाव जीतकर आए सभी 12 पार्षदों को भी अनुशासन भंग करने के लिए निलंबित कर दिया गया है।

फडणवीस बोले- नहीं चाहिए ऐसा गठबंधन

बता दें कि महाराष्ट्र में कुछ नगर निकायों में चुनाव के बाद भाजपा ने अपने विरोधी दलों कांग्रेस और एआईएमआईएम (AIMIM) के साथ गठबंधन कर लिया है। हालांकि मुख्यमंत्री फडणवीस ने ऐसे गठबंधनों को खारिज करते हुए कहा है कि इसमें शामिल भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे गठबंधनों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी नहीं है और यह अनुशासनहीनता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस या AIMIM से कोई भी गठबंधन स्वीकार्य नहीं है। जिन भाजपा नेताओं ने ऐसा किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गठबंधन को तोड़ा जाएगा।

अजब-गजब गठबंधन क्यों?

अंबरनाथ में शिवसेना 27 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत थी। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने के लिए भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी (अजित पवार) के साथ मिलकर 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' गठबंधन बनाया और बहुमत हासिल कर लिया।

दिसंबर में हुए चुनाव में भाजपा के 14, कांग्रेस के 12 और एनसीपी के 4 पार्षद जीतें। इस बेमेल गठबंधन को एक निर्दलीय ने भी समर्थन दिया। 31 दिसंबर को भाजपा के स्थानीय कार्यालय में बैठक हुई, जिसके बाद गठबंधन बनाने की जानकारी ठाणे के जिला अधिकारी को देते हुए एक पत्र सौंपा गया। इसके बाद भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटिल अंबरनाथ नगर परिषद की अध्यक्ष चुनी गईं। हालांकि शिंदे की शिवसेना ने इस गठबंधन को अनैतिक व मौकापरस्ती बताया।

अंबरनाथ नगर निकाय सदन में कुल 60 सदस्य हैं। 20 दिसंबर को हुए चुनावों में एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 27 सीटें जीतीं, जो बहुमत से मात्र चार कम थीं। भाजपा को 14, कांग्रेस को 12, एनसीपी को चार सीट मिलीं, जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार भी जीते थे।

अकोला में ओवैसी की पार्टी से गठबंधन

वहीं, अकोला जिले के अकोट में भाजपा ने एआईएमआईएम समेत कई दलों के साथ ‘अकोट विकास मंच’ बनाया। भाजपा को 11 और ओवैसी की पार्टी को 5 सीट पर जीत मिली थी। अन्य दलों के समर्थन से गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार किया और यहां भाजपा की माया धुले मेयर बन गईं। जबकि कांग्रेस और प्रकाश अंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाडी विपक्ष की भूमिका में है।

गौरतलब है कि राज्य में भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के गठबंधन महायुति की सरकार है। लेकिन भाजपा के कांग्रेस और AIMIM के साथ गठबंधनों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी।