इलाज ( Treatment ) को दर-दर भटके परिजन ( Relatives ), अधिकांश निजी ( Private ) और सरकारी (Government ) अस्पतालों ( Hospitals ) ने कहा कि वे कोरोना वायरस ( COVID-19 ) के रोगियों के इलाज में बिजी ( Busy )
मुंबई. मुंबई के विभिन्न अस्पतालों में कोरोना वायरस के लक्षणों की जांच की जा रही है तो कई जगहों पर वायरस से संक्रमितों का इलाज चल रहा है। ऐसे में शनिवार को एक 72 वर्षीय बुजुर्ग के बिना इलाज के ही मौत हो गई। दरसअल, ओमप्रकाश शुक्ला को सांस लेने में तकलीफ के चलते उन्हें मंगलवार को पश्चिमी उपनगर के थुंगा अस्पताल ले जाया गया। शुक्ला के दामाद जगदीश मिश्रा ने कहा कि अस्पताल ने उन्हें अन्यत्र ले जाने के लिए कहा था। बुधवार शाम को शुक्ला के बेटे विनय और दामाद उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाने की कोशिश की। हालांकि, अधिकांश निजी और सरकारी अस्पतालों ने कहा कि वे कोरोना वायरस के रोगियों के इलाज में बिजी हैं, ऐसे में उनके इलाज के लिए आईसीयू में जगह नहीं मिल सकी।
किसी अस्पताल में नहीं मिला इलाज...
अनेकों उपाय के बाद भी नहीं मिली कहीं भर्तीमलाड के एक प्रसिद्ध अस्पताल ने कोरोना के संदेह के चलते उनका इलाज करने से मना कर दिया, शुक्ला को सिर्फ सांस लेने में तकलीफ थी। डॉक्टरों ने उनके रिश्तेदारों से कहा कि पहले उनकी कोरोना वायरस की रिपोर्ट लाएं, तभी उनका इलाज किया जा सकेगा। ऐसे में रिश्तेदारों ने शुक्ला को फिर से थुंगा अस्पताल लाया। हालांकि मिश्रा ने आरोप लगाया कि जगह की कमी के कारण आईसीयू को भर्ती नहीं किया जा सका। वहीं शताब्दी अस्पताल में भी उनका इलाज नहीं किया जा सका।
इलाज मिलता तो बच जाती जान...
अंत में सारे उपाय विफल होने के बाद रात को 11:30 बजे शुक्ला को घर लाया गया। ऑक्सीजन सिलेंडर उन्हें घर पर ही फिट किया गया था। इसके बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका, इस पर परिवार के सदस्यों ने कहा कि शुक्ला को कहीं इलाज न मिल पाने के चलते मौत हो गई। समय से नहीं मिल सका इलाजपरिवार के सदस्यों ने शुक्ला के इलाज के लिए करीब 8-10 अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन उन्हें कहीं भी भर्ती नहीं किया गया। जगदीश मिश्रा ने आरोप लगाया कि अगर समय पर इलाज मिलता तो उन्हें बचाया जा सकता था।