मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि देश में बड़ी संख्या में राष्ट्रभक्त मुसलमान हैं और हमें उनसे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन जो लोग देश के आक्रमणकारियों को अपना आदर्श मानते हैं, उनके खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।
महाराष्ट्र की राजनीति में टीपू सुल्तान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब विधानसभा तक पहुंच गया है। बजट सत्र के दौरान आज मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के उस बयान पर कड़ा जवाब दिया, जिसमें उन्होंने टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के समकक्ष बताया था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि टीपू सुल्तान को शिवाजी महाराज के बराबर कभी नहीं माना जा सकता, इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सही इतिहास पढ़ाया गया होता तो देश का एक भी मुसलमान औरंगजेब और टीपू सुल्तान को हीरो नहीं मानता।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 14 फरवरी को कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल मालेगांव दौरे पर थे। वहां डिप्टी मेयर के केबिन में मैसूर के 18वीं शताब्दी के शासक टीपू सुल्तान की फोटो को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा था कि टीपू सुल्तान को शिवाजी महाराज के समान ही सम्मान दिया जाना चाहिए। इस बयान के बाद उनकी चौतरफा आलोचना हुई। विवाद बढ़ता देख सपकाल ने माफी मांग ली, लेकिन सदन में विपक्षी नेताओं भास्कर जाधव और विजय वडेट्टीवार द्वारा मुद्दा उठाए जाने पर मुख्यमंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टिपू सुल्तान अच्छे थे या बुरे, यह अलग विषय है, लेकिन उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज के समान बताने पर आपत्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में वर्षों तक इतिहास को एकतरफा ढंग से पढ़ाया गया।
महाराष्ट्र विधानसभा में बोलते हुए सीएम फडणवीस ने कहा कि देश के इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने कहा कि इतिहास की पुस्तकों में लंबे समय तक मुगल काल को अधिक महत्व दिया गया, जबकि छत्रपति शिवाजी महाराज और मराठा इतिहास को सीमित स्थान मिला। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सही इतिहास समय पर पढ़ाया गया होता तो एक भी मुसलमान औरंगजेब जैसे आक्रांताओं को अपना नायक नहीं मानता।
फडणवीस ने कहा, "दशकों तक NCERT की किताबों में मुगल साम्राज्य को 17 पन्ने दिए गए, जबकि छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को महज एक पैराग्राफ में समेट दिया गया। मोदी सरकार ने अब इसे बदला है और मराठा साम्राज्य के इतिहास को 20 पन्ने दिए हैं।"
मुख्यमंत्री ने टीपू सुल्तान के इतिहास का वह पक्ष रखा जिसे अक्सर दबाने के आरोप लगते रहे है। उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों से लड़ाई सिर्फ अपना शासन बचाने के लिए लड़ी थी, न कि राष्ट्रभक्ति के लिए। फडणवीस ने दावा किया कि टीपू सुल्तान वही था जिसने 75 हजार हिंदुओं और 33 हजार नायरों का कत्लेआम किया था। उन्होंने कहा, "हमें यह तो बताया गया कि वह महान राजा था, लेकिन उसके द्वारा किए गए नरसंहार के बारे में कभी नहीं पढ़ाया गया।"
सदन में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई मुसलमानों के खिलाफ नहीं, बल्कि आक्रांताओं की मानसिकता के खिलाफ है। उन्होंने कहा, "हमारे देश में अनेक राष्ट्रभक्त मुसलमान हैं और उनके प्रति हमारा कोई विरोध नहीं है। लेकिन जो लोग इस देश के विरोधियों और औरंगजेब जैसे आक्रमणकारियों को अपना आदर्श मानेंगे, उनके खिलाफ हमारी लड़ाई हमेशा जारी रहेगी।"