
सीएम फडणवीस और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल (Photo: IANS)
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की राजनीति में बड़ा भूकंप आया है। दशकों से कांग्रेस के साथ मजबूती से जुड़े वारजूरकर परिवार ने आखिरकार पार्टी को अलविदा कह दिया है। चिमूर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक डॉ. अविनाश वारजूरकर और उनके भाई व पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष डॉ. सतीश वारजूरकर ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस के लिए इसे एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह परिवार क्षेत्र में पार्टी का मुख्य आधार माना जाता था।
वारजूरकर बंधुओं के इस फैसले के पीछे कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी को मुख्य कारण बताया जा रहा है। डॉ. सतीश वारजूरकर ने स्पष्ट किया कि वे पिछले काफी समय से पार्टी की कार्यप्रणाली से असहज थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाजी के कारण ही उन्हें 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि इसी गुटबाजी की वजह से कांग्रेस ने जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक और चंद्रपुर नगर निगम में भी अपनी सत्ता गंवाई है। अब जिला परिषद में भी वहीँ होगा।
अपने इस्तीफे में वारजूरकर बंधुओं ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे प्रहार किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में गुटबाजी अब चरम पर पहुंच चुकी है, जिससे जमीन पर काम करने वाले सामान्य कार्यकर्ताओं का भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पार्टी का इस्तेमाल अपने निजी स्वार्थ के लिए कर रहे हैं। बार-बार शिकायत करने के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए वारजूरकर बंधुओं ने बुधवार को मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इस दौरान भाजपा विधायक बंटी भांगडिया भी उपस्थित थे। सतीश वारजूरकर ने पुष्टि की है कि वे गुरुवार को भाजपा के मुंबई कार्यालय में आधिकारिक रूप से पार्टी में प्रवेश करेंगे।
इस दल-बदल से चिमूर और आसपास के क्षेत्रों में भाजपा को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जबकि कांग्रेस के लिए अपने ‘गढ़’ चंद्रपुर में अस्तित्व बचाना बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
Published on:
26 Feb 2026 11:47 am
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