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भिवंडी में भाजपा का दांव पड़ा उल्टा, 9 पार्षदों की बगावत ने पलटा पासा, कांग्रेस की सत्ता तय

महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर सामने आया है। भिवंडी-निजामपुर नगर निगम में मेयर चुनाव से ठीक पहले भाजपा को करारा झटका लगा है। भाजपा के 22 पार्षदों में से 9 पार्षदों ने अलग गुट बनाकर कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला किया है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Feb 19, 2026

Devendra Fadnavis and Eknath Shinde

देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे (Photo: X/@Dev_Fadnavis @mieknathshinde)

महाराष्ट्र के भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका (BNMC) में मेयर चुनाव से ठीक पहले भाजपा (BJP) को बड़ा झटका लगा है। भाजपा के 22 पार्षदों में से 9 ने पार्टी से नाता तोड़कर एक अलग गुट बना लिया है और कांग्रेस नीत गठबंधन को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है। इस दलबदल ने न केवल भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, बल्कि भिवंडी में कांग्रेस के लिए अपना मेयर (महापौर) चुनने का रास्ता भी पूरी तरह साफ कर दिया है।

ऐसे बदला सियासी गणित

भाजपा से अलग हुए इन 9 पार्षदों ने 'भिवंडी सेक्युलर फ्रंट' (BSF) का गठन किया है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार, कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के गठबंधन ने इस नए फ्रंट (बीएसएफ) के सहयोग से 90 सदस्यीय सदन में 46 के जादुई आंकड़े को पार कर लिया है। अब इस गठबंधन के पास 50 से ज्यादा पार्षदों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है, जो बहुमत से कहीं अधिक है।

भाजपा-शिंदे सेना के मतभेद से गई सत्ता की चाबी?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह फूट भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच बढ़ते मतभेदों का परिणाम है। बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर वर्चस्व की लड़ाई और रणनीतिक चूक के कारण भाजपा अपने ही पार्षदों को एकजुट रखने में विफल रही। दिलचस्प बात यह है कि जहां भाजपा का कुनबा बिखर गया, वहीं समाजवादी पार्टी ने भी शिवसेना को समर्थन देकर समीकरणों को और अधिक पेचीदा बना दिया था, लेकिन आखिर में बाजी कांग्रेस के पाले में जाती दिख रही है।

विलास पाटिल की गिरफ्तारी से बढ़ी खटास

शिवसेना ने कोणार्क विकास पार्टी (केवीए) के साथ मिलकर मेयर पद हासिल करने की रणनीति बनाई थी। लेकिन पूर्व मेयर और कोणार्क विकास पार्टी के प्रमुख विलास पाटिल की गिरफ्तारी के बाद ऐसा नहीं हो सका। पाटिल को शनिवार को 2025 के कथित धोखाधड़ी के मामले में ठाणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने गिरफ्तार किया। उन पर लोगों को घर दिलाने के बहाने ठगी करने का आरोप है। शिंदे गुट के नेताओं ने इसे भाजपा की साजिश करार दिया, जिससे शिवसेना का मेयर नहीं बन सके। इस वजह से स्थानीय स्तर पर भाजपा और शिवसेना के रिश्ते और तल्ख हो गए।  

अपनों की बगावत से बिगाड़ भाजपा का खेल

बता दें कि पिछले महीने हुए भिवंडी-निजामपुर नगर निगम चुनावों में कांग्रेस 30 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बाद भाजपा को 22, शिवसेना को 12 और एनसीपी (शरद पवार) को 12 सीटें मिली थीं। अन्य दलों में सपा ने 6, कोणार्क विकास पार्टी (केवीए) ने 4 और भिवंडी विकास अघाड़ी ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी। एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी जीत दर्ज की थी।

यह चुनाव भाजपा और शिवसेना ने गठबंधन में लड़ा था। अब भाजपा के 9 पार्षदों के बगावत से कांग्रेस की स्थिति बेहद मजबूत हो गई है। 16 फरवरी को नामांकन दाखिल होने के बाद अब सबकी नजर 20 फरवरी पर टिकी है, जब मेयर पद का चुनाव होगा।