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‘इसलिए मैं बच गया’; दिवेआगर समुद्र हादसे में 8 दोस्तों की मौत का गवाह बना छात्र, बताई घटना की असली सच्चाई

Diveagar Sea Tragedy: दिवेआगर समुद्र हादसे में 8 दोस्तों की मौत के गवाह आळंदी के छात्र ने पूरा घटनाक्रम बताया। छात्र ने कहा कि वह समुद्र में नहीं उतरा, इसलिए उसकी जान बच गई।
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Oct 03, 2026
Diveagar Sea Tragedy
मरने वाले छात्रों के दोस्त ने बताई सच्चाई, फोटो सोर्स- ANI

Diveagar Beach Accident:महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के प्रसिद्ध दिवेआगर समुद्र तट पर हुए दर्दनाक हादसे में आठ छात्रों की डूबने से मौत हो गई। सभी छात्र पुणे के आलंदी स्थित ‘विनर्स अकादमी’ के थे और एक दिवसीय शैक्षणिक यात्रा पर रायगढ़ किले और दिवेआगर समुद्र तट गए थे। हादसे में जान गंवाने वाले 17 साल के प्रणव रामदास बनसोडे के अंतिम संस्कार के दौरान उसके बचपन के दोस्त सोहम गोरे की आंखों से आंसू छलक पड़े। सोहम ने इस हादसे की पूरी घटना बताई।

‘मुझे तैरना आता था, लेकिन समुद्र में नहीं उतरा’

आलंदी निवासी और 11वीं कक्षा में विज्ञान वर्ग के छात्र सोहम ने बताया कि उसे तैरना आता है, लेकिन उसे समुद्र के खारे पानी में तैरना पसंद नहीं है। इसी वजह से वह समुद्र में नहीं उतरा और उसकी जान बच गई। सोहम ने बताया कि प्रणव और वह स्कूल के समय से दोस्त थे। दोनों ‘विनर्स अकादमी’ में भी साथ पढ़ते थे। संस्थान की ओर से आयोजित यात्रा में शामिल होने के लिए छात्रों से उनके माता-पिता की सहमति लेने को कहा गया था।

42 छात्र और 5 शिक्षक-शिक्षिकाएं गए थे यात्रा पर

सोहम के मुताबिक, यात्रा के लिए 25 लड़के और 17 लड़कियों समेत कुल 42 छात्र गुरुवार तड़के करीब 3 बजे एकत्र हुए थे। उनके साथ दो शिक्षक और तीन शिक्षिकाएं भी थीं। सबसे पहले सभी बस से रायगढ़ किले पहुंचे। वहां रोपवे बंद होने के कारण छात्रों को पैदल ही किले तक जाना पड़ा। दोपहर करीब 2 बजे किले से नीचे उतरने के बाद सभी ने एक होटल में खाना खाया और इसके बाद दिवेआगर समुद्र तट के लिए रवाना हुए।

समुद्र में उतरने से पहले शिक्षकों ने दी थी हिदायत

सोहम ने बताया कि शाम करीब 5 बजे सभी समुद्र तट पर पहुंचे। शिक्षकों ने छात्रों को निर्देश दिया था कि जिन्हें तैरना आता है, वही समुद्र में उतरें और बाकी छात्र किनारे पर रहें। कुछ शिक्षक भी छात्रों के साथ पानी में उतरे थे। छात्राएं किनारे के पास कम गहरे पानी में खेल रही थीं। सोहम ने बताया कि वह तैरना जानता था, लेकिन समुद्र के खारे पानी में तैरना पसंद नहीं होने के कारण वह किनारे पर ही रुका रहा।

कुछ ही मिनटों में मच गई अफरा-तफरी

सोहम के अनुसार, शुरुआत में छात्र शिक्षकों के साथ कमर तक पानी में ही थे और बहुत गहरे नहीं गए थे। लेकिन कुछ ही मिनटों में समुद्र तट पर पुलिस और वॉटर स्पोर्ट्स कर्मचारियों की भागदौड़ शुरू हो गई। जब सोहम ने पास जाकर देखा तो उसके कुछ दोस्त पानी में डूब रहे थे। शिक्षक अमर अडक और मृणाल नारखेडे के साथ तैरना जानने वाले कुछ छात्रों ने डूब रहे साथियों को बचाने की पूरी कोशिश की। कुछ छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन प्रणव समेत आठ छात्रों की जान नहीं बचाई जा सकी।

समुद्र तट पर नहीं था लाइफगार्ड और चेतावनी बोर्ड

सोहम ने दावा किया कि हादसे वाली जगह पर किसी तरह का खतरे की चेतावनी देने वाला बोर्ड नहीं था। इसके अलावा वहां लाइफगार्ड या लाइफ जैकेट की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। हादसे के बाद सोहम ने अपने पिता गोविंद गोरे को फोन कर घटना की जानकारी दी। घबराए पिता ने बेटे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उससे वीडियो कॉल पर भी बात की। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे सोहम अन्य छात्रों और शिक्षकों के साथ बस से आलंदी वापस पहुंचा।

चार छात्रों का आलंदी में अंतिम संस्कार

हादसे के बाद स्थानीय अस्पताल में मृत छात्रों का पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद रायगढ़ पुलिस ने शव उनके परिजनों को सौंप दिए। शुक्रवार, 2 अक्टूबर को इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि देने के लिए आलंदी में बंद रखा गया। मृत छात्रों में आलंदी निवासी प्रणव बनसोडे, सुमित अहिरे, कैवल्य वासनकर और तन्मय वाहिले का आलंदी की श्मशानभूमि में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।

Updated on:
03 Oct 2026 02:52 pm
Published on:
03 Oct 2026 02:52 pm