महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, बहुत जगहों से शिकायतें आ रही हैं। कुछ लोगों का नाम वोटर लिस्ट से गायब है। कुछ लोगों को कहां मतदान करना है ये पता ही नहीं है। पहली बार जो स्याही लगाई जा रही है उसे भी साफ कर सकते हैं। चुनाव आयोग क्या कर रही है?
मुंबई सहित राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के लिए मतदान खत्म हो चुका है। हालांकि मतदान के दौरान वोटरों के उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने चुनाव आयोग पर पक्षपात करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस पर अब राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने जवाब दिया है।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने मतदान के बाद मीडिया से बात करते हुए सरकार और चुनाव आयोग को घेरा। उन्होंने कहा, "पहले जो स्याही इस्तेमाल होती थी, उसकी जगह अब नए मार्कर पेन का इस्तेमाल हो रहा है। जिसे हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करके तुरंत मिटाया जा सकता है। स्याही लगाओ वोट डालो और बाहर जाकर उसे पोंछ दो और फिर अंदर जाकर दोबारा वोट डालो। यह सब सत्ता में बने रहने के लिए किया जा रहा है।" उन्होंने दावा किया कि एक व्यक्ति को दो बार वोट डालते हुए पकड़ा भी गया है।
उधर, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई जगहों से शिकायतें आ रही हैं कि मतदाताओं का नाम लिस्ट में नहीं है, स्याही आसानी से साफ हो जा रही है। ठाकरे ने कहा, "इतनी निर्लज्ज सरकार मैंने कभी नहीं देखी। पुरानी ईवीएम मशीनें लगाई गई हैं और अब पहली बार स्याही भी मिट रही है। ये लोग 'वन नेशन, वन इलेक्शन' इसलिए चाहते हैं ताकि पूरे देश में एक साथ धांधली कर सकें। यह लोकतंत्र की सरेआम हत्या है।"
इन आरोपों पर सफाई देते हुए राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने कहा कि स्याही को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महानगरपालिका चुनावों में इस्तेमाल की जा रही स्याही वही 'अमिट स्याही' (Indelible Ink) है जिसे भारतीय चुनाव आयोग इस्तेमाल करता है। अंतर सिर्फ इतना है कि इसे अब बोतल के बजाय मार्कर पेन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। मार्कर पेन का यह प्रयोग नया नहीं है, यह 2011 से स्थानीय निकाय चुनावों में लगातार उपयोग किया जा रहा है। इस स्याही को हटाया नहीं जा सकता।
चुनाव आयोग ने साफ किया कि अगर कोई स्याही मिटा भी देता है, तो भी वह दोबारा वोट नहीं दे पाएगा। मतदान केंद्र पर मौजूद अधिकारियों के पास हर मतदाता का लिखित रिकॉर्ड होता है। एक बार वोट डालने के बाद उस रिकॉर्ड में प्रविष्टि हो जाती है, जिससे दोबारा मतदान संभव नहीं है।
चुनाव आयोग ने चेतावनी दी है कि जानबूझकर स्याही मिटाना और दोबारा वोट डालने की कोशिश करना एक अपराध है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में सतर्क रहने के निर्देश फिर से सभी संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं।