
Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच तेज हो गई है। बुधवार को पुणे ग्रामीण पुलिस ने आरोपी चेतन चौधरी (22) को कड़ी सुरक्षा के बीच लोहगढ़ किले पर ले जाकर घटना का क्राइम सीन रीक्रिएट किया। इस दौरान पुलिस ने चेतन की गेट एनालिसिस (Gait Analysis) भी कराया, ताकि घटनास्थल पर मिले सबूतों का मिलान किया जा सके और पूरी वारदात को दोबारा समझा जा सके। दूसरी तरफ, इस केस में एक नया मोड़ आ गया है। चेतन के वकील ने पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि पूरी एफआईआर और अब तक की पुलिस रिमांड रिपोर्ट में चेतन चौधरी का नाम महज दो ही जगह आया है।
पुलिस बुधवार सुबह चेतन चौधरी को लोहगढ़ किले पर लेकर पहुंची, जहां 18 जून को 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या हुई थी। इस दौरान पुणे ग्रामीण के एसपी संदीप सिंह गिल और एडिशनल एसपी शुभम कुमार खुद मौके पर मौजूद रहे। पुलिस ने केतन के वजन के बराबर एक डमी तैयार की थी, जिसके जरिए यह समझने की कोशिश की गई कि वारदात को अंजाम कैसे दिया गया। इससे पहले पुलिस ने केतन की होने वाली पत्नी व चेतन की कथित प्रेमिका सिया गोयल (20) के साथ भी क्राइम सीन रीक्रिएशन किया था।
पुणे ग्रामीण के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शुभम कुमार ने बताया कि जांच के तहत चेतन चौधरी को घटनास्थल पर ले जाया गया, जहां उसने पुलिस को उस दिन की पूरी घटनाओं का क्रम बताया। सुबह करीब 8:30 बजे प्रक्रिया शुरू की और यह सुबह 10:30 बजे तक ये सब चला। उन्होंने कहा कि जांच के लिए केतन अग्रवाल के वजन के बराबर एक डमी तैयार की गई थी, जिसकी मदद से पूरे घटनाक्रम को दोबारा दोहराया गया।
आरोपी चेतन चौधरी के वकील एडवोकेट राधिकेश उत्तरवार (Advocate Radhikesh Uttarwar) ने कहा कि पुलिस ने पहले ही सात दिन की पुलिस हिरासत प्राप्त कर ली थी। ऐसे में अदालत के सामने यह बताना जरूरी था कि जांच में क्या प्रगति हुई और आगे पुलिस हिरासत की आवश्यकता क्यों है।
उन्होंने कहा कि पूरी एफआईआर (FIR) और अब तक की पुलिस रिमांड रिपोर्ट में चेतन चौधरी का नाम महज दो ही जगह आया है। पहली बार तब जब मृतक केतन ने अपने पिता से बातों-बातों में चेतन का जिक्र किया था, और दूसरी बार सिर्फ एक संदेह के तौर पर कि इस कृत्य के पीछे चेतन का हाथ हो सकता है।
एडवोकेट राधिकेश ने कहा, पुलिस के पास चेतन की किसी विशिष्ट या सीधी भूमिका का कोई ठोस सबूत नहीं है और पूरी रिपोर्ट में केवल 'आरोपियों' शब्द का सामूहिक रूप से इस्तेमाल किया गया है। इन कारणों के आधार पर फिर से पुलिस हिरासत की जरूरत नहीं लगती।
उनका कहना है कि मोबाइल फोन रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का विश्लेषण पुलिस न्यायिक प्रक्रिया के तहत भी कर सकती है। इसके लिए आरोपी को लगातार पुलिस हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने सात दिन की अतिरिक्त हिरासत मांगी थी, लेकिन अदालत ने केवल 3 जुलाई तक चार दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की।
एडवोकेट राधिकेश ने कहा कि अभी तक चेतन पर लगे सभी आरोप केवल आरोप हैं। पुलिस को अदालत में ठोस और स्वतंत्र साक्ष्यों के जरिए यह साबित करना होगा कि उसने जो घटनाक्रम तैयार किया है, वह वास्तव में उसी तरह हुआ था। उन्होंने कहा कि पुलिस क्राइम सीन रीक्रिएशन, गेट एनालिसिस और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पुलिस के पास कितने मजबूत सबूत हैं।
बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया कि एफआईआर और अब तक की रिमांड रिपोर्ट में चेतन चौधरी का नाम केवल दो बार आया है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में चेतन की विशिष्ट भूमिका का स्पष्ट उल्लेख नहीं है और अधिकतर जगह सिर्फ आरोपी शब्द का सामूहिक रूप से इस्तेमाल किया गया है। बचाव पक्ष ने अदालत से चेतन से मुलाकात की अनुमति भी मांगी है ताकि उसका पक्ष विस्तार से जाना जा सके।
चेतन के वकील एडवोकेट राधिकेश उत्तरवार ने कहा कि 3 जुलाई के बाद पुलिस के लिए अतिरिक्त रिमांड हासिल करना मुश्किल होगा, क्योंकि व्यक्तिगत हिरासत में की जाने वाली अधिकांश जांच पूरी हो चुकी होगी। उन्होंने बताया कि अगली सुनवाई में पुलिस हिरासत के बजाय न्यायिक हिरासत में यरवडा सेंट्रल जेल भेजने का अनुरोध किया जाएगा।