
सुनेत्रा पवार और एकनाथ शिंदे (Photo: IANS)
Shiv Sena: महाराष्ट्र की राजनीति से बड़ी खबर सामने आई है। सोलापुर जिले में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को बड़ा झटका लगा है। वैराग नगर पंचायत के नगराध्यक्ष सुजाता डोलसे, उपनगराध्यक्ष निरंजन भूमकर समेत 15 नगरसेवक शिवसेना के शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में सभी ने शिवसेना में प्रवेश किया।
एक साथ नगराध्यक्ष, उपनगराध्यक्ष और 15 नगरसेवकों के पार्टी छोड़ने से सोलापुर जिले में एनसीपी को बड़ा नुकसान माना जा रहा है। इस राजनीतिक घटनाक्रम का असर बार्शी तालुका की राजनीति पर भी पड़ने की संभावना है।
गौरतलब हो कि निरंजन भूमकर इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से बार्शी विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। कई वर्षों से एनसीपी में सक्रिय थे। हालांकि, अब उन्होंने पार्टी का साथ छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना का दामन थाम लिया है। भूमकर के साथ वैराग नगर पंचायत के 15 नगरसेवकों के शिंदे गुट में जाने से स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा शुरू हो गई है।
वैराग नगर पंचायत के नगराध्यक्ष, उपनगराध्यक्ष समेत 15 नगरसेवकों का एक साथ पार्टी छोड़ना अजित पवार गुट के लिए स्थानीय स्तर पर बड़ा झटका माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम महायुति के घटक दलों के बीच ही हुआ है।
अब तक विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के शिंदे गुट में शामिल होने की खबरें सामने आती रही थीं। लेकिन अब महायुति के ही एक घटक दल से जुड़े स्थानीय जनप्रतिनिधियों के शिंदे गुट में जाने से गठबंधन के भीतर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
विधानसभा चुनाव के बाद से ही शिवसेना के शिंदे गुट में अलग-अलग दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के शामिल होने का सिलसिला जारी है। महाविकास आघाड़ी से जुड़े कई नेता भी शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं।
इसका सबसे बड़ा असर शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट पर देखने को मिला है। हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बाद उद्धव ठाकरे गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद शिंदे गुट में चले गए। इसके बाद उद्धव ठाकरे गुट के पास केवल 3 लोकसभा सांसद रह गए हैं, जबकि शिंदे गुट के लोकसभा सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
शिंदे गुट में अब तक विपक्षी दलों के नेताओं के प्रवेश की खबरें सामने आती रही थीं। लेकिन इस बार सत्तारूढ़ महायुति में सहयोगी एनसीपी के ही नेताओं के शिंदे गुट में जाने के बाद तस्वीर बदलती नजर आ रही है। ऐसे में एक ही गठबंधन के दो दलों के बीच स्थानीय स्तर पर नेताओं और जनप्रतिनिधियों के इस तरह पाला बदलने से आने वाले समय में राजनीतिक खींचतान बढ़ सकती है। फिलहाल इस दलबदल पर एनसीपी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Updated on:
19 Aug 2026 12:32 pm
Published on:
19 Aug 2026 12:15 pm
