
Lawrence Bishnoi Gang: अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले के बाद जब लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट जारी कर इसकी जिम्मेदारी ली, तो पहली नज़र में यह सिर्फ एक ऑनलाइन शेखी बघारने का जरिया लगा। हालांकि, जांच अधिकारियों के लिए यह स्क्रीनशॉट अपराधियों द्वारा खुद तैयार किए गए 'ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस मैप' में छिपे सुरागों को खंगालने का एक बेहतरीन मौका साबित हुआ।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अंडरवर्ल्ड के पारंपरिक गोपनीयता के कोड को छोड़कर, लॉरेंस गैंग ने अपराध करने के एक घंटे के भीतर स्क्रीनशॉट शेयर कर हिंसा का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। कई मामलों में तो वे गोलियों के सीधे वीडियो भी अपलोड कर देते हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि ये 'साइबर-मैनिफेस्टो' गैंग के अंदरूनी कामकाज की पोल खोलते हैं।
मुंबई के इस मामले में भी सोशल मीडिया पोस्ट से पुलिस को शुरुआती लीड्स मिलीं, जिसमें तीन नाम अनमोल बिश्नोई, अनिल पंडित और हरमन संधू तथा दिल्ली के 'गोगी-मान गैंग' का हैशटैग शामिल था। इन सुरागों के आधार पर पुलिस ने अनिल पंडित के नेटवर्क का पीछा किया और कई गिरफ्तारियां कीं।
गैंग के ये सोशल मीडिया पोस्ट सिर्फ वारदातों की घोषणा तक सीमित नहीं हैं। इनके जरिए नए सदस्यों को इंट्रोड्यूस किया जाता है। उदाहरण के लिए, पिछले साल जारी एक स्क्रीनशॉट में 'टायसन बिश्नोई' और 'आरज़ू बिश्नोई' जैसे रहस्यमयी नामों का जिक्र किया गया था। इसके अलावा, ये पोस्ट गैंग के भीतर प्रमोशन, नए गठबंधन और पुरानी दुश्मनों को दर्शाने वाले डिजिटल टूल के रूप में काम करते हैं। एक जांच अधिकारी के अनुसार, 'ये हर नाम और हैशटैग में टिप छिपाकर तैयार की गई प्रोपेगैंडा मशीनें हैं। हैशटैग और उपनामों (Monikers) से मुख्य गुर्गों के ठिकाने तक का अंदाजा लगाया जा सकता है।'
जांच में सामने आया है कि गैंग के कई सदस्य अपनी भौगोलिक स्थिति को ही अपने सोशल मीडिया हैंडल का हिस्सा बना लेते हैं, जैसे फ़तेह पुर्तगाल, सैम कनाडा, मन्ना ब्रैम्पटन, मैंडी स्पेन और एक्स ऑस्ट्रेलिया। वहीं अनिल पंडित खुद को 'अनिल पंडित USA' लिखता था। हालांकि, हाल ही में उसके हैंडल से 'USA' हटने से जांच एजेंसियां यह मान रही हैं कि यह या तो एफबीआई (FBI) के दबाव का असर है या ठिकाना बदलने की रणनीति।