Maharashtra Scam: अकोला जिला परिषद के शिक्षा विभाग में अंतर-जिला शिक्षक तबादला प्रक्रिया में एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। जांच में यह पाया गया है कि 268 शिक्षकों ने तबादले के लिए फर्जी दस्तावेज दिए है।
महाराष्ट्र के शिक्षा क्षेत्र से सामने आए दो चौंकाने वाले मामलों ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सातारा में दसवीं की परीक्षा से जुड़ी बड़ी लापरवाही सामने आई है, तो वहीं अकोला में शिक्षक तबादला प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है।
सातारा जिले के फलटण तालुका स्थित विडणी गांव के उत्तरेश्वर हाईस्कूल और जूनियर कॉलेज में बेहद गंभीर लापरवाही सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, यहां 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं 6वीं के छात्रों से जांच करवाई गईं।
यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। इस घटना को लेकर जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई जल्द हो सकती है। यह घटना सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ मानी जा रही है।
दूसरा बड़ा मामला अकोला जिला परिषद के शिक्षा विभाग से सामने आया है, जहां अंतरजिला शिक्षक तबादला प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी पाई गई है। जांच में खुलासा हुआ है कि लगभग 268 शिक्षकों ने मनचाही जगह पर तबादला पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। इन शिक्षकों ने दिव्यांग होने, परित्यक्ता (पति द्वारा छोड़ी गई महिला) होने या घर से दूरी के फर्जी प्रमाण पत्र पेश किए थे।
हद तो तब हो गई जब कुछ शिक्षकों ने केवल लाभ पाने के लिए खुद को फर्जी तरीके से दिव्यांग बताया, तो कुछ ने तलाक के फर्जी कागजात तक लगा दिए। इस धोखाधड़ी के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की पारदर्शिता पूरी तरह सवालों के घेरे में है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रभारी अनुमंडल शिक्षा अधिकारी दिनेश दुतोंडे समेत चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही करीब 300 अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां पाई गई हैं, जिससे स्पष्ट हुआ है कि नियमों का दुरुपयोग कर कई लोगों ने अनुचित लाभ उठाने की कोशिश की।
शिकायत के बाद की गई त्रिस्तरीय जांच में कई स्तरों पर लापरवाही सामने आई है। जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और दस्तावेजों की सही तरीके से जांच न होना प्रमुख कारणों में शामिल हैं। यही वजह रही कि अपात्र शिक्षक भी तबादले का लाभ लेने में सफल हो गए। इस मामले में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।