
वसई-भायंदर के बीच बनेगा 'डबल डेकर' पुल, 90 मिनट का सफर मात्र 10 मिनट में पूरा (Photo: IANS/File)
मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की कनेक्टिविटी में एक क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है। भायंदर (ठाणे) और वसई (पालघर) को जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित 'डबल डेकर' पुल का रास्ता अब साफ होता नजर आ रहा है। इस पुल के बनने से न केवल ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि भायंदर से वसई आने-जाने का समय भी करीब 90 मिनट से घटकर महज 10 मिनट रह जाएगा। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) द्वारा राज्य सरकार को भेजे गए नए प्रस्ताव के अनुसार, वसई की खाड़ी (क्रीक) पर एक विशाल बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। जिस पर से मुंबई मेट्रो और गाड़ियां दोनों चलेंगी।
जानकारी के मुताबिक, मीरा रोड से विरार तक प्रस्तावित 25 किमी लंबी मेट्रो लाइन-13 के मार्ग पर अब एक विशाल डबल डेकर ब्रिज बनाने की योजना तैयार की जा रही है। यह पुल भायंदर और वसई शहर को सीधे जोड़ेगा, जिससे अभी का 90 मिनट का सफर घटकर सिर्फ 10 मिनट में पूरा हो सकेगा।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना कई वर्षों से अटकी हुई थी, लेकिन अब एमएमआरडीए ने इसे आगे बढ़ाने के लिए तेजी कदम बढ़ाया हैं। पिछले सप्ताह इस संबंध में राज्य सरकार को नया प्रस्ताव भी सौंपा गया है।
वसई-भायंदर ब्रिज का विचार पहली बार साल 2000 में सामने आया था। इसके बाद 2013 में परियोजना को मंजूरी भी मिल गई, लेकिन करीब 13 साल गुजरने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया।
नई योजना के मुताबिक, वसई खाड़ी पर एक मल्टी-लेवल डबल डेकर ब्रिज बनाया जाएगा। सबसे नीचे सड़क मार्ग होगा, उसके ऊपर मेट्रो लाइन-13 का ट्रैक और सबसे ऊपरी स्तर पर छह लेन का पुल बनाने की योजना है।
वर्तमान में वसई से भायंदर जाने के लिए कोई सीधा सड़क मार्ग नहीं है। लोगों को या तो लोकल ट्रेन का सहारा लेना पड़ता है या फिर नेशनल हाईवे NH-48 के जरिए 39 किमी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। लेकिन अब वसई क्रीक पर पुल बनने के बाद यह दूरी घटकर सिर्फ 5 किलोमीटर रह जाएगी। इससे लाखों यात्रियों का समय और ईंधन दोनों बचेंगे।
इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2,500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। भायंदर से वसई पहुंचने के लिए अभी लोगों को करीब 39 किमी लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। जिसमें एनएच-48 भी शामिल है, जहां अक्सर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है।
प्रस्तावित पुल मुंबई-वसई से सीधे गुजरात की ओर जाने वाले मार्ग के रूप में भी काम करेगा। अभी वसई और भायंदर के बीच कोई सीधा सड़क संपर्क नहीं है और यात्री मुख्य रूप से रेलवे पर निर्भर हैं।
यह नया पुल रेलवे ट्रैक के पश्चिमी हिस्से से बनाया जाएगा। पुल की शुरुआत उत्तन रोड स्थित नेताजी सुभाषचंद्र मैदान, मुर्धा गांव के पास से होगी। इसके बाद यह भायंदर के नमक क्षेत्रों से गुजरते हुए पंजू द्वीप को जोड़ेगा और वसई खाड़ी पार कर नायगांव पहुंचेगा। पुल का अंतिम हिस्सा नायगांव के कुटिन्हो रोड पर समाप्त होगा।
जानकारी के मुताबिक, कई प्रशासनिक बाधाओं के कारण यह 13 साल से लटका हुआ था। इस प्रोजेक्ट के लिए पांच अलग-अलग सरकारी एजेंसियों से मंजूरी जरूरी है। अब तक महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण से अनुमति मिल चुकी है। हालांकि, अभी वन विभाग और केंद्र सरकार के नमक आयुक्त कार्यालय से मंजूरी मिलना बाकी है।
दरअसल, इस परियोजना के लिए मैंग्रोव क्षेत्र और नमक उत्पादन वाली जमीन का अधिग्रहण करना पड़ेगा। इसी वजह से मामला लंबे समय से अटका हुआ है। जानकारी के मुताबिक, पुल निर्माण से पहले नमक उत्पादन वाली जमीन पर रहने वाले परिवारों को मुआवजा देना जरूरी होगा। साल 2013 में वहां रहने वाले कई परिवारों ने जमीन पर मालिकाना हक का दावा करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, जमीन अधिग्रहण और मुआवजे का मुद्दा अभी भी लंबित है।
Published on:
13 May 2026 06:36 pm
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