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Maharashtra News: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की हवाई यात्राओं को लेकर नियमों में भारी बदलाव कर दिया है। अब कोई भी मंत्री अपनी मर्जी से सरकारी या चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। इसके लिए बकायदा मुख्यमंत्री कार्यालय से लिखित मंजूरी लेना जरूरी कर दिया गया है।
सरकार के इस कड़े कदम के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह अपील है, जिसमें उन्होंने सरकारी संसाधनों के किफायत से इस्तेमाल, ईंधन की बचत और फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने पर जोर दिया था। केंद्र के इसी विजन को आगे बढ़ाते हुए महाराष्ट्र सरकार ने प्रशासनिक अनुशासन की दिशा में यह बड़ा कदम उठाया है। अब मंत्रियों को हवाई सफर के लिए ठोस कारण और आधिकारिक मंजूरी की जरूरत होगी।
मिली जानकारी के मुताबिक, यह देखा गया था कि कई बार बहुत कम दूरी के दौरों के लिए भी सरकारी विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे ईंधन की बर्बादी के साथ ही सरकारी खजाने पर भी करोड़ों का बोझ पड़ रहा था। नए नियमों के अनुसार, अब केवल बहुत जरूरी और आधिकारिक कार्यों के लिए ही चार्टर्ड विमान उपलब्ध कराए जाएंगे। बिना मुख्यमंत्री की मंजूरी के विमान में सवार होकर नहीं जा सकेंगे।
राज्य पर बढ़ते राजस्व दबाव और विकास परियोजनाओं के लिए फंड की जरूरतों को देखते हुए सरकार अब बचत मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने साफ कर दिया है कि सरकारी दौरों, बैठकों और यात्राओं में पूरी तरह से पारदर्शिता और अनुशासन बरता जाना चाहिए। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य जनता के टैक्स के पैसे का सही और मर्यादित इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
आपको बता दें कि इस फैसले के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर इसे 'गुड गवर्नेंस' की मिसाल बताया जा रहा है, वहीं कयास लगाए जा रहे हैं कि विपक्ष इसे मंत्रियों की कार्यक्षमता पर सवाल उठाकर घेर सकता है। फिलहाल, इस आदेश के बाद अब मंत्रियों को अपने दौरों के लिए सड़क मार्ग या सामान्य उड़ानों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है।
Published on:
13 May 2026 05:46 pm
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